बागपत, 8 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के बागपत में हुए भीषण सड़क हादसे ने एक बार फिर नेविगेशन ऐप और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्थान के गोगामेड़ी बागड़ धाम से वापस लौट रहे श्रद्धालुओं की पिकअप गाड़ी हादसे का शिकार हो गई। इस दर्दनाक हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे से पहले चालक ने रास्ता तलाशने के लिए गूगल मैप का सहारा लिया था।
बताया जा रहा है कि श्रद्धालुओं की पिकअप गाड़ी चालक विपिन चला रहे थे। रास्ते में उन्होंने गलती से बड़ागांव कट की ओर गाड़ी नीचे उतार दी। इसके बाद वहां से वापस पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर चढ़े और आगे सही रास्ते पर जाने के लिए यूटर्न लेने का प्रयास किया।
गूगल मैप पर दिखा कट, मौके पर बंद था रास्ता
यूटर्न लेने के लिए चालक ने गूगल मैप पर रास्ता देखा। मैप पर करीब 200 मीटर आगे एक कट दिखाई दे रहा था। चालक ने उसी रास्ते से यूटर्न लेने का प्रयास किया, लेकिन मौके पर स्थिति अलग थी। बताया गया कि जिस कट को गूगल मैप पर रास्ते के रूप में दिखाया जा रहा था, उसे एनएचएआई ने पत्थर रखकर बंद किया हुआ था।
चालक गाड़ी को डिवाइडर के किनारे वाली लाइन पर लेकर आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए एक कैंटर की साइड पिकअप गाड़ी से लग गई और भीषण हादसा हो गया। हादसे में 12 श्रद्धालुओं की जान चली गई।
इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि निर्माणाधीन या बदले हुए मार्गों की जानकारी डिजिटल मैप पर समय से अपडेट नहीं होने की स्थिति में वाहन चालकों को कितनी सावधानी बरतनी चाहिए।
अप्रैल में भी गूगल मैप से जुड़ा था जानलेवा हादसा
बागपत में हुआ यह मामला ऐसा पहला हादसा नहीं है, जिसमें गूगल मैप पर दिखाए गए रास्ते को लेकर सवाल उठे हों। अप्रैल 2026 में दिल्ली के नांगलोई से देहरादून जा रहे दो इंजीनियरों की कार निर्माणाधीन दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर पहुंच गई थी।
बताया गया कि दोनों गूगल मैप पर रास्ता देखकर आगे बढ़ रहे थे। निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे पर बीच में रखे पत्थरों से उनकी कार टकरा गई। हादसे में इंजीनियर कपिल और उनके दोस्त प्रयागराज कौशिक की मौत हो गई थी।
यह घटना भी इस बात की ओर इशारा करती है कि ड्राइविंग के दौरान केवल डिजिटल नेविगेशन पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है, विशेषकर उन सड़कों पर जहां निर्माण कार्य चल रहा हो या मार्ग में बदलाव किया गया हो।
19 साल पहले हादसे में गई थी 13 लोगों की जान
बागपत में इससे पहले एक साथ बड़ी संख्या में लोगों की मौत का दर्दनाक हादसा वर्ष 2007 में हुआ था। उस समय सिवालखास, जिला मेरठ के रिश्तेदार एक व्यक्ति की मौत के बाद बागपत के बसौद गांव आए थे।
वापस सिवालखास जाते समय मेरठ-बागपत नेशनल हाईवे पर बालैनी के पास उनका टेंपो अनियंत्रित होकर पलट गया था। हादसा इतना भीषण था कि 13 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि छह लोग घायल हुए थे।
अब करीब 19 साल बाद एक साथ 12 लोगों की मौत ने पुराने हादसे की यादें ताजा कर दी हैं।
2017 में नाव हादसे में 19 मजदूरों की मौत
बागपत में बड़े हादसों का सिलसिला पुराना रहा है। सितंबर 2017 में काठा गांव के पास यमुना नदी में नाव पलटने की घटना में 19 मजदूरों की मौत हो गई थी। ये मजदूर हरियाणा में मजदूरी के लिए जा रहे थे।
नाव अनियंत्रित होकर यमुना में पलट गई थी। हादसे में महिला मजदूर भी शामिल थीं। छह मजदूरों को बचाकर बाहर निकाला गया था, लेकिन 19 लोगों की जान चली गई थी।
2022 में कैंटर की टक्कर से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत
अगस्त 2022 में भी बागपत में एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हुई थी। डौला गांव के किसान फतेह मोहम्मद अपनी गर्भवती पत्नी तबस्सुम और बेटियों इलमा, इकरा व मायरा के साथ सिवालखास स्थित ससुराल गए थे।
वहां से वापस लौटते समय मेरठ-बागपत नेशनल हाईवे पर बालैनी टोल प्लाजा के पास एक कैंटर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में फतेह मोहम्मद, उनकी पत्नी और तीनों बेटियों की मौत हो गई थी।
डिजिटल मैप के साथ सड़क संकेतों पर भरोसा जरूरी
बागपत के ताजा हादसे ने सड़क सुरक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात सामने रखी है। गूगल मैप या किसी भी नेविगेशन ऐप को रास्ता बताने वाला सहायक माना जाना चाहिए, अंतिम और अचूक मार्गदर्शक नहीं। निर्माणाधीन सड़क, बंद कट, डायवर्जन या बदले हुए मार्ग की स्थिति में वाहन चालकों को मौके पर लगे सड़क संकेतों और बैरिकेडिंग को प्राथमिकता देनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, वाहन चलाते समय चालक को गति नियंत्रित रखने के साथ सड़क की वास्तविक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। किसी डिजिटल मैप पर रास्ता खुला दिखाई देने के बावजूद यदि मौके पर रास्ता बंद है, तो वहां से आगे बढ़ने के बजाय सुरक्षित विकल्प तलाशना जरूरी है।
बागपत के इस भीषण हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि डिजिटल मैप पर बंद रास्तों और नए डायवर्जन की जानकारी कितनी तेजी से अपडेट होती है और वाहन चालकों को नेविगेशन के साथ सड़क संकेतों के प्रति कितना सतर्क रहना चाहिए।














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