मेरठ। मेहनत, लगन और सही दिशा में किए गए प्रयास से पारंपरिक खेती के साथ शुरू किया गया मधुमक्खी पालन आज बड़े कारोबार का रूप ले सकता है। मेरठ के किसान भारत चौधरी इसकी मिसाल बने हैं। महज दो मधुमक्खी पेटियों से शुरू हुआ उनका सफर आज ‘एंट्रियो नेचुरल्स’ के रूप में करीब 3 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर तक पहुंच चुका है। यह कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों का सही उपयोग कर किसान अपनी आमदनी के नए स्रोत तैयार कर सकते हैं।
दो मधुमक्खी पेटियों से शुरू हुआ सफर
भारत चौधरी ने वर्ष 2018 में महज दो मधुमक्खी पेटियों से मधुमक्खी पालन का कारोबार शुरू किया था। शुरुआत छोटी थी, लेकिन आगे बढ़ने का लक्ष्य बड़ा था। अनुभव और मेहनत के साथ उन्होंने मधुमक्खी पालन को व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में विकसित किया।
समय के साथ मधुमक्खियों की संख्या बढ़ी और शहद उत्पादन का दायरा भी विस्तारित होता गया। धीरे-धीरे यह काम स्वरोजगार से आगे बढ़कर उद्यम का रूप लेने लगा।
‘एंट्रियो नेचुरल्स’ से करोड़ों का कारोबार
मधुमक्खी पालन को व्यावसायिक स्तर पर आगे बढ़ाते हुए भारत चौधरी ने ‘एंट्रियो नेचुरल्स’ के जरिए कारोबार को नई पहचान दी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आज इस व्यवसाय का वार्षिक टर्नओवर करीब 3 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
मधुमक्खी पालन की खासियत यह है कि सीमित संसाधनों से इसकी शुरुआत की जा सकती है और अनुभव के साथ इसका विस्तार संभव है। शहद के अलावा मधुमक्खी के मोम और अन्य उत्पादों से भी कारोबार को आगे बढ़ाने की संभावनाएं रहती हैं।
सरकारी योजनाओं से मिला सहारा
भारत चौधरी की सफलता में सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली व्यवस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। फरवरी 2024 में जिला ग्रामोद्योग विकास विभाग से उन्हें 50 लाख रुपये की ऋण सहायता मिलने की जानकारी सामने आई है। इस तरह की वित्तीय सहायता उद्यमियों को व्यवसाय का विस्तार करने, आवश्यक संसाधन जुटाने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करती है।
सरकार की ओर से कृषि आधारित गतिविधियों और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दिए जाने से किसानों के लिए खेती के साथ वैकल्पिक आय के साधन विकसित करने के अवसर बढ़े हैं।
किसानों के लिए प्रेरणा बना मॉडल
मधुमक्खी पालन किसानों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे खेती के साथ जोड़ा जा सकता है। सरसों, सूरजमुखी, फलदार पौधों और अन्य फूलों वाली फसलों वाले क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन से शहद उत्पादन के साथ परागण की प्रक्रिया को भी बढ़ावा मिलता है।
ऐसे में किसान एक ही समय में कृषि उत्पादन और मधुमक्खी पालन से लाभ हासिल कर सकते हैं। ग्रामीण युवाओं के लिए भी यह स्वरोजगार और उद्यमिता का बेहतर विकल्प बन सकता है।
छोटी शुरुआत से बड़ा कारोबार संभव
भारत चौधरी की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि कारोबार शुरू करने के लिए हमेशा बड़े निवेश की आवश्यकता नहीं होती। सही प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी, बाजार की समझ और लगातार मेहनत से छोटी शुरुआत को बड़े उद्यम में बदला जा सकता है।
मेरठ के भारत चौधरी का सफर उन किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो पारंपरिक खेती के साथ अपनी आय बढ़ाने के नए रास्ते तलाश रहे हैं। मधुमक्खी पालन जैसे कृषि आधारित व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ स्वरोजगार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे सकते हैं।










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