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बीएचयू में सर्जरी टीम ने ट्यूमर निकालकर पैर की फिबुला हड्डी से बनाया नया जबड़ा

वाराणसी, 8 अगस्त : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय की ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी (ओएमएफएस) इकाई ने 35 वर्षीय एक युवक के निचले जबड़े के ट्यूमर का सफल ऑपरेशन कर उसके पैर की फिबुला हड्डी से नया जबड़ा तैयार किया है। मरीज अब स्वस्थ हैं।
प्रो. अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि लखीमपुर खीरी निवासी मरीज ओपीडी में चेहरे पर सूजन और निचले जबड़े की विकृति की शिकायत लेकर पहुंचा था। जांच में उसके निचले जबड़े में बड़ा ट्यूमर पाया गया, जिससे जबड़े की संरचना पूरी तरह प्रभावित हो गई थी।
मरीज पिछले लगभग सात वर्षों से एमेलोब्लास्टोमा नामक ट्यूमर से पीड़ित था। उसने कई स्थानों पर उपचार कराया, लेकिन स्थायी लाभ नहीं मिला। बाद में उसे उपचार के लिए बीएचयू आने की सलाह दी गई। मरीज एक वाहन कंपनी में वॉशमैन के रूप में कार्यरत है।
प्रो सिंह ने बताया कि लंबे समय से चेहरे की असमानता के कारण मरीज सामाजिक रूप से असहज महसूस करता था और लोगों के बीच जाने से हिचकिचाता था। इससे उसमें सामाजिक चिंता भी विकसित हो गई थी। इस जटिल शल्यक्रिया का नेतृत्व ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी इकाई के प्रो. अखिलेश कुमार सिंह ने किया। सर्जिकल दल में प्रो. नरेश कुमार शर्मा, डॉ. श्वेता (वरिष्ठ रेजिडेंट), डॉ. आशुतोष आर्या, डॉ. अंशु तथा डॉ. पूनम यादव (कनिष्ठ रेजिडेंट) शामिल रहे।
निश्चेतना विभाग से प्रो. यशपाल सिंह, डॉ. तनवी आनंद (वरिष्ठ रेजिडेंट) तथा डॉ. दीपक (कनिष्ठ रेजिडेंट) ने भी ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ट्रामा सेंटर के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी ऑपरेशन थिएटर में करीब आठ घंटे तक चली इस शल्यक्रिया में ट्यूमर से पूरी तरह प्रभावित निचले जबड़े को निकाल दिया गया। इसके बाद मरीज के दाहिने पैर की फिबुला हड्डी लेकर उससे नया जबड़ा तैयार किया गया। इसके पश्चात सूक्ष्म रक्तवाहिका तकनीक की सहायता से फिबुला की धमनियों को गर्दन की धमनियों से जोड़कर नए जबड़े में रक्त संचार स्थापित किया गया। इस प्रक्रिया को माइक्रोवैस्कुलर फ्री फिबुला फ्लैप पुनर्निर्माण शल्यक्रिया कहा जाता है।
ऑपरेशन के बाद मरीज के चेहरे की बनावट सामान्य हो गई है। उसे सामाजिक रूप से आत्मविश्वास वापस मिला है और वह मानसिक रूप से भी काफी प्रसन्न है। चिकित्सकों के अनुसार उसके पैर में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं है और वह सामान्य रूप से चल-फिर रहा है। दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. एच.सी. बरनवाल ने इस जटिल एवं सफल शल्यक्रिया के लिए पूरी चिकित्सक टीम को बधाई दी।

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