कोलकाता, 22 अगस्त 2026। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते प्रभाव के बीच हिंदुत्व की राजनीति से जुड़े नए चेहरों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी कड़ी में हिंदू सुरक्षा समिति के प्रमुख अविजित दास का नाम सामने आया है।
एक रिपोर्ट में अविजित दास को ‘हिंदू बंगा’ की विचारधारा को आगे बढ़ाने वाले नेताओं में शामिल बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दास पश्चिम बंगाल में हिंदू राजनीतिक लामबंदी और पहचान के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं।
‘हिंदू बंगा’ पर जोर
अविजित दास की राजनीति में ‘हिंदू बंगा’ का विचार प्रमुख बताया जाता है। उनके समर्थक इसे बंगाल में हिंदू पहचान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखते हैं।
हालांकि, उनके कथित बयानों को लेकर विवाद भी सामने आया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय को बाहर करने, आर्थिक बहिष्कार और हिंसा का समर्थन करने जैसी बातें कही हैं।
बंगाल की राजनीति में बदलता समीकरण
पश्चिम बंगाल में भाजपा के राजनीतिक विस्तार के साथ राज्य में हिंदुत्व आधारित राजनीति को लेकर बहस भी तेज हुई है। राजनीतिक विश्लेषण में यह सवाल उठ रहा है कि भाजपा के विस्तार से क्या राज्य में नए और अधिक मुखर हिंदुत्ववादी संगठनों के लिए राजनीतिक जगह बनी है।
इसी संदर्भ में हिंदू सुरक्षा समिति और अविजित दास की गतिविधियों को देखा जा रहा है।
बयानों को लेकर विवाद
अविजित दास से जुड़े कथित बयानों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कठोर रुख अपनाने और आर्थिक तथा सामाजिक बहिष्कार की बात किए जाने का दावा किया गया है। यदि ऐसे बयान सार्वजनिक रूप से दिए गए हैं, तो वे सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
हालांकि, ऐसे आरोपों और बयानों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से करना जरूरी है। किसी समुदाय के खिलाफ हिंसा या भेदभाव को बढ़ावा देना लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
कौन हैं अविजित दास?
अविजित दास को हिंदू सुरक्षा समिति के प्रमुख के तौर पर बताया गया है। वह ‘हिंदू बंगा’ के मुद्दे को लेकर सक्रिय हैं और बंगाल में हिंदू राजनीतिक पहचान को मजबूत करने की वकालत करते हैं।
उनकी गतिविधियों और बयानों ने पश्चिम बंगाल में हिंदुत्व की राजनीति के नए चेहरों को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।














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