September 25, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की पहचान ऑनलाइन सार्वजनिक करने के खिलाफ जनहित याचिका पर केंद्र, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, Meta और X को नोटिस जारी किया है।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की पहचान ऑनलाइन सार्वजनिक करने और पुलिस सोशल मीडिया हैंडल्स पर उनकी तस्वीरें या वीडियो अपलोड किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta तथा X (पूर्व में Twitter) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिका में पुलिस और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आरोपियों के चेहरे या पहचान उजागर करने वाली तथा उन्हें अपमानजनक स्थिति में दिखाने वाली तस्वीरों और वीडियो को सार्वजनिक करने पर रोक लगाने की मांग की गई है।

पुलिस सोशल मीडिया अकाउंट्स से पोस्ट हटाने की मांग

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता हेमेंद्र पटेल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन की दलीलों पर विचार किया।

याचिका में मांग की गई है कि सभी राज्यों को अपने पुलिस विभागों के सोशल मीडिया अकाउंट्स से ऐसी पोस्ट हटाने का निर्देश दिया जाए, जिनमें किसी आरोपी का चेहरा या पहचान उजागर होती हो अथवा उसे किसी भी तरह अपमानजनक स्थिति में दिखाया गया हो।

याचिकाकर्ता ने भविष्य के लिए भी पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग की है।

हथकड़ी और रस्सियों में दिखाने पर आपत्ति

याचिका में आरोपियों की तस्वीरों और वीडियो को लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई है। इसमें कहा गया है कि कई बार सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री सामने आती है, जिसमें आरोपियों को हथकड़ी लगाए, रस्सियों से बांधे, घुटनों के बल बैठाए या घसीटते हुए दिखाया जाता है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस तरह की प्रस्तुति कानून के स्थापित सिद्धांतों और मानवाधिकारों की भावना के विपरीत है। याचिका में ऐसी सामग्री के प्रसार पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की गई है।

Meta और X के लिए सख्त नीति की मांग

याचिका में Meta (Facebook और Instagram) तथा X Corporation को भी पक्षकार बनाया गया है। इसमें इन प्लेटफॉर्म्स के लिए ऐसी पारदर्शी और प्रभावी नीतियां बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है, जिससे आरोपियों की पहचान उजागर करने या उनके साथ अमानवीय व्यवहार दिखाने वाली सामग्री के प्रसार को रोका जा सके।

इसके अलावा आम यूजर्स की ओर से आपत्तिजनक तस्वीर या वीडियो रिपोर्ट किए जाने पर ऐसी सामग्री को जल्द हटाने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की मांग भी की गई है।

याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का जवाब सामने आने के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related News