ढाका, 25 अगस्त। राष्ट्रमंडल पत्रकार संघ (सीजेए) ने बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) द्वारा तीन वरिष्ठ पत्रकारों को जुलाई 2024 के आंदोलन से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में सुनवाई पूरी होने तक जेल में रखने के आदेश की कड़ी निंदा की है।
इन पत्रकारों में भोर के कागोज के पूर्व संपादक एवं सीजेए के उपाध्यक्ष श्यामल दत्ता, एकात्तर टीवी के प्रबंध निदेशक एवं प्रधान संपादक मोजम्मेल हक बाबू तथा इसी चैनल की मुख्य संवाददाता फरजाना रूपा शामिल हैं।
सीजेए ने कहा कि वह आरोपों के आधार को लेकर विशेष रूप से चिंतित है। आरोपों में 14 जुलाई 2024 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के गणभवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों की भागीदारी भी शामिल है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि पत्रकारों ने हसीना से सवाल करते समय ‘भड़काऊ टिप्पणियां’ की थीं, जिसके बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों को ‘रजाकार’ और ‘रजाकारों के बच्चे’ कहा था।

सीजेए ने कहा कि संवाददाता सम्मेलनों में राजनीतिक नेताओं से सवाल करना, चाहे सवाल कितने भी विवादास्पद क्यों न हों, पत्रकारिता का मूल हिस्सा है और इसे मानवता के खिलाफ अपराध नहीं माना जा सकता।
संघ ने चेतावनी दी कि पत्रकारों के पेशेवर काम के लिए उन पर मुकदमा चलाने के साधन के रूप में आईसीटी का इस्तेमाल बांग्लादेश में प्रेस की स्वतंत्रता के लिए बेहद चिंताजनक मिसाल कायम करेगा।
न्यायाधिकरण ने सोमवार को श्यामल दत्ता, मोजम्मेल हक बाबू और फरजाना रूपा को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-2 के समक्ष पेश किए जाने के बाद जेल भेज दिया। बचाव पक्ष के वकील पलाश चंद्र रॉय ने दलील दी कि दत्ता के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध के आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं।
अभियोजक गाजी मोनावर हुसैन तमीम ने आरोप लगाया कि 14 जुलाई के संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों की टिप्पणियों ने उसी दिन बाद में शुरू हुए प्रदर्शनों को बढ़ावा देने में योगदान दिया। अभियोजक फारुक अहमद ने न्यायाधिकरण को बताया कि मामले के संबंध में तीनों पत्रकारों के खिलाफ 17 अगस्त को पेशी वारंट जारी किए गए थे।
तीनों पत्रकारों को शेख हसीना और उनकी अवामी लीग के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से हटाने वाले जन आंदोलन के बाद अगस्त और सितंबर 2024 में पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था। शुरुआत में उन पर जुलाई-अगस्त के प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों से जुड़े हत्या के मामले लगाए गए थे। बाद में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप वाले व्यापक आईसीटी मामलों में शामिल किया गया।
सीजेए ने उनकी हिरासत की अवधि और परिस्थितियों को लेकर भी चिंता जताई। संघ ने कहा कि तीनों पत्रकार पहले ही लंबे समय से हिरासत में हैं और इस दौरान उनके खिलाफ उपलब्ध सबूतों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। संगठन ने उनकी कथित चिकित्सा जरूरतों पर भी चिंता जताई है।
सीजेए ने कार्यवाही, उचित कानूनी प्रक्रिया और विश्वसनीय सबूतों के मानकों की तत्काल समीक्षा की मांग की। संघ ने बांग्लादेश के अधिकारियों से पत्रकारों को तब तक रिहा करने का आग्रह किया, जब तक स्वतंत्र रूप से स्थापित किसी आपराधिक अपराध का स्पष्ट और ठोस सबूत मौजूद न हो।
सीजेए ने कहा कि मीडिया की स्वतंत्रता सरकारों की ओर से दी गई कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक समाज की एक आवश्यक शर्त है।















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