प्रकाशन तिथि: 30 सितंबर 2026 | Baghpat Wire

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में उनके निलंबन और चुनाव आयोग के फैसलों को कथित तौर पर एकतरफा लिए जाने का मुद्दा उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अनुमति दे दी है। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, बहु-सदस्यीय आयोग में निर्णय लेने की प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कई सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ता का दावा है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को मिली शक्तियों का इस्तेमाल आयोग को सामूहिक रूप से करना चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ महत्वपूर्ण फैसले केवल मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा लिए गए। याचिका में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कथित आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में अगले सप्ताह होगी सुनवाई

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। अदालत ने याचिका को सूचीबद्ध करने की अनुमति दी है। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल कर चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के निलंबन की मांग भी की गई है। इसके अलावा चुनाव आयोग के कुछ फैसलों को लेकर न्यायिक जांच कराने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से चुनाव आयोग के मूल रिकॉर्ड, बैठकों के कार्यवृत्त और फैसलों से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कराने की मांग की है।

अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई में याचिका में उठाए गए मुद्दों पर अदालत के समक्ष विचार किया जाएगा। फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता है।

अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की शक्तियों पर सवाल

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को प्राप्त शक्तियों के इस्तेमाल की प्रक्रिया पर सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है और इसके महत्वपूर्ण फैसले सामूहिक रूप से लिए जाने चाहिए।

याचिकाकर्ता के अनुसार, आयोग में निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए। यदि किसी विषय पर सदस्यों के बीच मतभेद होता है तो निर्णय बहुमत के आधार पर किया जाना चाहिए।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसलों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के बजाय मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा एकतरफा फैसले लिए गए।

इस मामले में याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि आयोग की शक्तियों का इस्तेमाल निर्धारित संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार होना चाहिए।

14 फैसलों पर चुनाव आयुक्तों की आपत्ति का दावा

याचिका में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कथित आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयोग के नाम पर लिए गए कम से कम 14 फैसलों पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।

याचिका के अनुसार, इन फैसलों को लेकर आयोग के भीतर मतभेद थे। याचिकाकर्ता ने इन कथित आपत्तियों को चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत किया है।

इस संबंध में याचिकाकर्ता ने अदालत से चुनाव आयोग के मूल रिकॉर्ड और बैठकों के कार्यवृत्त मंगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित फैसले किस प्रक्रिया के तहत लिए गए थे।

हालांकि, याचिका में लगाए गए इन आरोपों पर अभी अदालत का कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है। अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई में इस मामले से जुड़े मुद्दों पर विचार किया जाएगा।

SIR की प्रक्रिया को लेकर भी उठाए गए सवाल

याचिका में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया से संबंधित कुछ निर्णयों और व्यवस्थाओं पर आपत्ति जताई है।

याचिका में कहा गया है कि बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग में निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाने चाहिए। यदि आयोग के सदस्यों के बीच किसी विषय पर मतभेद होता है तो बहुमत के आधार पर फैसला किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने SIR से जुड़े फैसलों को भी इसी संदर्भ में उठाया है। उनका दावा है कि आयोग की निर्णय प्रक्रिया में सभी सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

याचिका में SIR के अलावा मतदाता सूची से संबंधित अन्य प्रशासनिक और तकनीकी विषयों का भी उल्लेख किया गया है।

Form-6 और मतदाता सूची के डेटाबेस पर भी सवाल

राकेश कुमार सिंह की याचिका में Form-6 में कथित बदलाव और Electoral Roll Database के प्रबंधन का मुद्दा भी शामिल है।

Form-6 का उल्लेख करते हुए याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही मतदाता सूची के डेटाबेस के प्रबंधन से जुड़े विषयों को भी अदालत के सामने रखा गया है।

याचिका में इन मुद्दों के संबंध में संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता चाहते हैं कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड और फाइलों के आधार पर फैसलों की प्रक्रिया की पड़ताल की जाए।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार Form-6 में कथित बदलाव और डेटाबेस प्रबंधन को लेकर लगाए गए आरोपों पर अदालत ने अभी कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।

पश्चिम बंगाल SIR की 16.10 लाख अपीलों का उल्लेख

याचिका में पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी करीब 16.10 लाख अपीलों का भी उल्लेख किया गया है।

याचिकाकर्ता ने इस विषय को भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों के साथ अदालत के सामने रखा है। याचिका में मतदाता सूची पुनरीक्षण और उससे संबंधित अपीलों के मामलों का उल्लेख करते हुए आयोग के फैसलों की प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।

पश्चिम बंगाल SIR से जुड़ी अपीलों का मुद्दा याचिका में शामिल महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। याचिकाकर्ता ने इससे संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत कराने का अनुरोध किया है।

चुनाव आयोग के मूल रिकॉर्ड पेश कराने की मांग

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग के मूल रिकॉर्ड तलब करने की मांग की है। इसमें आयोग की बैठकों के मिनट्स, फाइल नोटिंग और फैसलों से संबंधित मंजूरी के दस्तावेज शामिल हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इन दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि आयोग के महत्वपूर्ण फैसले किस प्रक्रिया के तहत लिए गए थे और उनमें संबंधित सदस्यों की क्या भूमिका थी।

याचिका में विशेष रूप से अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच लिए गए कम से कम 14 फैसलों का उल्लेख किया गया है। इन फैसलों पर चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों के मद्देनजर रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।

CEC के निलंबन और न्यायिक जांच आयोग के गठन की मांग

याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग की गई है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का अनुरोध किया है।

याचिकाकर्ता चाहते हैं कि चुनाव आयोग के फैसलों और उनसे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच हो। इसके लिए उन्होंने सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित करने की मांग रखी है।

हालांकि, निलंबन और जांच आयोग के गठन की मांग याचिकाकर्ता की ओर से की गई है। इसे अदालत का आदेश या स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

अगले सप्ताह की सुनवाई पर रहेगी नजर

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल याचिका में चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, SIR, Form-6, मतदाता सूची के डेटाबेस और पश्चिम बंगाल में अपीलों से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने की अनुमति दी है। अब सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता की मांगें और उनके आधार पर उठाए गए सवाल आएंगे।

इस मामले में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि याचिका में लगाए गए आरोप अभी याचिकाकर्ता के दावे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत की आगामी सुनवाई के बाद ही मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही की स्थिति स्पष्ट होगी।

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