प्रकाशन तिथि: 28 सितंबर 2026 | Baghpat Wire
नैनीताल: उत्तराखंड में पुरानी पेंशन योजना (OPS) में शामिल होने की मांग कर रहे राजस्व विभाग के कर्मचारियों को लेकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने देहरादून के जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि पुरानी पेंशन योजना में शामिल किए जाने के लिए कर्मचारियों की ओर से दिए गए विकल्प पत्रों पर दो महीने के भीतर स्पष्ट और तर्कसंगत आदेश पारित करें। अदालत ने यह समयसीमा आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से निर्धारित की है।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने तिलक राम जोशी, रोशन लाल शर्मा और ईश्वर दत्त शर्मा की ओर से दाखिल याचिका का अंतिम रूप से निस्तारण करते हुए यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं ने पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने के लिए दिए गए अपने विकल्प पत्रों पर कार्रवाई नहीं होने के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अदालत ने अपने आदेश में जिलाधिकारी, देहरादून को 27 मई 2026 को सौंपे गए प्रत्यावेदन पर निर्धारित समय के भीतर निर्णय लेने को कहा है। इस मामले में अदालत ने 25 सितंबर 2026 को आदेश पारित किया था, लेकिन आदेश की प्रति सोमवार, 28 सितंबर को उपलब्ध हुई।
पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने के लिए दाखिल की थी याचिका
मामले के अनुसार, तिलक राम जोशी, रोशन लाल शर्मा और ईश्वर दत्त शर्मा देहरादून जिले के राजस्व विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि वे वर्ष 1995-96 से राजस्व विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
याचिका में बताया गया कि याचिकाकर्ता संख्या एक वर्ष 2002 में नियमित हुए थे, जबकि दूसरे और तीसरे याचिकाकर्ता एक अक्टूबर 2005 की कट-ऑफ तिथि के बाद नियमित हुए थे।
राज्य सरकार की ओर से सात नवंबर 2023 को जारी अधिसूचना के तहत कट-ऑफ तिथि के बाद नियुक्त या नियमित हुए सरकारी कर्मचारियों से पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने के लिए एकमुश्त विकल्प मांगे गए थे। इसी अधिसूचना के आधार पर तीनों कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना का विकल्प चुनने के लिए आवेदन किया था।
सरकार की अधिसूचना के बाद जमा किए थे विकल्प पत्र
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उत्तराखंड सरकार की सात नवंबर 2023 की अधिसूचना के अनुपालन में उन्होंने पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने के लिए अपने विकल्प पत्र संबंधित अधिकारियों को सौंप दिए थे।
इन विकल्प पत्रों को उपजिलाधिकारी, चकराता और कालसी के कार्यालय में जमा कराया गया था। इसके बाद 30 जनवरी 2024 को दोनों कार्यालयों की ओर से विकल्प पत्र जिलाधिकारी, देहरादून को अग्रसारित कर दिए गए थे।
हालांकि, कर्मचारियों का कहना था कि उनके विकल्प पत्र जिलाधिकारी के पास पहुंचने के बावजूद उन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी जब उन्हें कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ तो उन्होंने आगे की कार्रवाई की।
27 मई 2026 को जिलाधिकारी को सौंपा प्रत्यावेदन
विकल्प पत्रों पर लंबे समय तक निर्णय नहीं होने के बाद तीनों कर्मचारियों ने 27 मई 2026 को जिलाधिकारी, देहरादून के समक्ष प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने के लिए पहले दिए गए विकल्प पत्रों पर कार्रवाई करने की मांग की।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उनके प्रत्यावेदन पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया और मामला लंबित रहा। इसके बाद उन्होंने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की।
याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया था कि संबंधित अधिकारियों को उनके विकल्प पत्रों पर कार्रवाई करने और एकमुश्त विकल्प को प्रभावी बनाने के लिए परमादेश जारी किया जाए।
हाईकोर्ट ने दो महीने में आदेश पारित करने के दिए निर्देश
मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने याचिका का अंतिम रूप से निस्तारण कर दिया। अदालत ने जिलाधिकारी, देहरादून को निर्देश दिया कि वे कर्मचारियों की ओर से 27 मई 2026 को दिए गए प्रत्यावेदन पर दो महीने के भीतर निर्णय लें।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिलाधिकारी को अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से दो महीने के अंदर तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश पारित करना होगा।
इस तरह अदालत ने कर्मचारियों के लंबित प्रत्यावेदन पर समयबद्ध निर्णय लेने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत ने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने का सीधा आदेश नहीं दिया है। जिलाधिकारी को संबंधित प्रत्यावेदन पर विचार कर स्पष्ट आदेश पारित करना होगा।
25 सितंबर को पारित हुआ था आदेश
इस मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 25 सितंबर 2026 को अपना आदेश पारित किया था। हालांकि, आदेश की प्रति 28 सितंबर को उपलब्ध हुई।
अदालत के निर्देश के बाद अब जिलाधिकारी, देहरादून को तीनों कर्मचारियों के प्रत्यावेदन पर निर्धारित समयसीमा के भीतर फैसला लेना होगा। कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने की मांग पर अंतिम निर्णय जिलाधिकारी के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुरानी पेंशन योजना से जुड़ा यह मामला उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने सरकार की अधिसूचना के तहत विकल्प पत्र जमा किए थे, लेकिन लंबे समय तक उन पर निर्णय नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रशासन को समयबद्ध निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
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