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गणेशोत्सव में दिखी जनसेवा की मिसाल, तुकाराम मुंढे के काम पर आधारित सजावट ने खींचा ध्यान

सतारा/अलीबाग, 19 सितंबर 2026: गणेशोत्सव के दौरान आमतौर पर भव्य पंडाल, आकर्षक सजावट और धार्मिक झांकियां लोगों का ध्यान खींचती हैं। लेकिन महाराष्ट्र में इस बार कुछ गणेश मंडलों ने उत्सव को जनजागरूकता और नागरिक जिम्मेदारी से जोड़ने की अनोखी पहल की है।

सतारा के निखिल रसल और रायगढ़ के अलीबाग स्थित आदर्श मित्र मंडल ने इस साल अपनी गणेश सजावट के जरिए खाद्य सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को सामने रखा है। दोनों आयोजनों में महाराष्ट्र के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तुकाराम मुंढे के सार्वजनिक कार्यों को केंद्र में रखा गया है।

निखिल रसल के घर 26वां गणेशोत्सव

सतारा के करंजे पेठ स्थित वरद विनायक कॉलोनी में निखिल रसल के परिवार में गणेशोत्सव मनाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। उनके पिता ने निखिल के जन्म के वर्ष से घर पर गणपति स्थापित करना शुरू किया था।

2026 में इस परंपरा का 26वां वर्ष है। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर निखिल ने इस बार पारंपरिक सजावट से अलग हटकर तुकाराम मुंढे के प्रशासनिक कामकाज और व्यवस्था में जवाबदेही की जरूरत को अपनी थीम बनाया।

परिवार और दोस्तों की मदद से करीब तीन दिन में तैयार की गई इस सजावट में अखबारों की खबरों, पोस्टरों, इन्फोग्राफिक्स और सार्वजनिक जानकारी का इस्तेमाल किया गया है।

खाद्य सुरक्षा को लेकर भी जागरूकता

इस गणेश सजावट का एक प्रमुख हिस्सा खाद्य पदार्थों में मिलावट और कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल को लेकर जागरूकता पैदा करना है।

सजावट में नूडल्स, चिकन मंचूरियन और जलेबी जैसे आम खाद्य पदार्थों के उदाहरणों के जरिए कृत्रिम सिंथेटिक रंगों के इस्तेमाल से जुड़े संभावित खतरों को समझाने की कोशिश की गई है।

इसके अलावा, प्रदर्शनी में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ी जानकारी भी प्रदर्शित की गई है।

थीम में तुकाराम मुंढे के प्रशासनिक कार्यकाल से जुड़े विभिन्न आंकड़ों और समाचार रिपोर्टों को भी शामिल किया गया है। इनका उद्देश्य आगंतुकों को केवल सजावट दिखाना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिक जिम्मेदारी पर सोचने के लिए प्रेरित करना है।

इंजीनियर के साथ कवि भी हैं निखिल

निखिल रसल की पहचान केवल सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में नहीं है। उन्हें मराठी कविता लिखने का भी शौक है।

उन्होंने कक्षा 4 से ही कविता लिखना शुरू किया था। वर्ष 2020 में 20 वर्ष की उम्र में उनकी पहली कविता पुस्तक ‘कवी शब्दांच्या दुनियेतला’ प्रकाशित हुई।

तकनीकी क्षेत्र में काम करने के साथ-साथ वह अपनी कविताएं सोशल मीडिया पर भी साझा करते हैं।

अलीबाग में ‘जनजागृतीचे तुकाराम’ थीम

रायगढ़ जिले के अलीबाग स्थित घरट आळी के आदर्श मित्र मंडल ने भी इस वर्ष तुकाराम मुंढे को केंद्र में रखकर सार्वजनिक गणेशोत्सव की थीम तैयार की है।

1989 में स्थापित यह मंडल 2026 में अपने सामुदायिक गणेशोत्सव का 38वां वर्ष मना रहा है।

इस साल की स्थापना का नाम ‘जनजागृतीचे तुकाराम’ रखा गया है। इसकी थीम संत तुकाराम और प्रशासनिक अधिकारी तुकाराम मुंढे के नाम को जोड़ते हुए जनजागरूकता और कर्तव्य भावना का संदेश देती है।

मंडल ने इसके लिए मराठी संदेश भी दिया है, जिसका भाव है कि भक्ति और कर्तव्य केवल नाम में नहीं, बल्कि काम में भी दिखाई देना चाहिए।

पहले भी सामाजिक मुद्दों पर रही है थीम

आदर्श मित्र मंडल के लिए गणेशोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा है। मंडल इससे पहले भी सामाजिक और जनहित के मुद्दों को अपनी सजावट का हिस्सा बनाता रहा है।

2025 में मंडल ने कन्या भ्रूण हत्या जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे पर जागरूकता पैदा करने वाली थीम तैयार की थी।

इसके अलावा पिछले वर्षों में ऑपरेशन सिंदूर, सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति, साक्षरता अभियान और वृक्षारोपण जैसे विषय भी मंडल की गणेशोत्सव सजावट का हिस्सा रहे हैं।

सालभर सामाजिक कार्य करता है मंडल

आदर्श मित्र मंडल की गतिविधियां गणेशोत्सव के 10 दिनों तक सीमित नहीं रहतीं। संगठन की ओर से पूरे साल विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

इनमें स्वैच्छिक रक्तदान शिविर, जरूरतमंद स्कूली बच्चों के लिए स्टेशनरी वितरण, बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान राहत कार्य तथा विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं शामिल हैं।

सामुदायिक गतिविधियों के लिए मंडल को स्थानीय स्तर से लेकर तालुका, जिला और राज्य स्तर के अधिकारियों से प्रशंसा भी मिल चुकी है।

उत्सव के साथ सामाजिक संदेश

सतारा में निखिल रसल की घरेलू गणेश सजावट हो या अलीबाग के आदर्श मित्र मंडल का सार्वजनिक पंडाल—दोनों उदाहरण बताते हैं कि गणेशोत्सव को धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक जागरूकता के मंच के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

सजावट और झांकियों के जरिए लोगों तक नागरिक जिम्मेदारी, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक भागीदारी जैसे मुद्दों को पहुंचाने की यह पहल उत्सव को एक अलग संदेश देती है।

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