मयूरभंज एक्सपायर्ड दवाएं

मयूरभंज में नदी के पास फेंकी गई एक्सपायर्ड दवाएं

मयूरभंज, ओडिशा 26 अगस्त। : ओडिशा के मयूरभंज जिले में जिला मुख्यालय अस्पताल (DHH) के पास एक नदी में बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड दवाएं फेंके जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि नदी में फेंके गए मेडिकल कचरे में एंटीबायोटिक्स, मास्क, सिरिंज, टेस्टिंग किट और अन्य जरूरी दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और अस्पताल में दवाओं की खरीद, भंडारण तथा वितरण व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि मेडिकल कचरे का इस तरह खुले में या जलस्रोत के पास निस्तारण पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

ADM ने जांच और कार्रवाई की बात कही

मयूरभंज के अतिरिक्त जिलाधिकारी (ADM) नेत्रानंद मलिक ने कहा कि जिलाधिकारी ने कलेक्टोरेट में सभी चिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक कर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था, विशेष रूप से जिले में रहने वाले आदिवासी समुदाय के लोगों के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि यदि नदी में एक्सपायर्ड दवाएं और मेडिकल सामग्री फेंके जाने की बात सही पाई जाती है, तो जिलाधिकारी को इसकी जानकारी दी जाएगी और मामले की जांच कराई जाएगी। दोष सामने आने पर कानून के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

ADM ने स्पष्ट किया कि मामले में जिम्मेदारी तय होने पर किसी को भी बचने का मौका नहीं दिया जाएगा।

सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता संजीव राउत ने अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की घटना पहले भी सामने आ चुकी है और समय-समय पर ऐसी स्थिति देखने को मिलती रही है।

राउत के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को सरकार की ओर से दवाएं उपलब्ध कराना एक सकारात्मक व्यवस्था है, जिससे जरूरतमंद मरीजों को उपचार में सहायता मिलती है। हालांकि, दवाओं की खरीद, भंडारण और वितरण के बाद यदि बड़ी मात्रा में दवाएं एक्सपायर हो जाती हैं और उनका उचित निस्तारण नहीं किया जाता, तो यह पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मेडिकल कचरे के निस्तारण पर सवाल

मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि अस्पताल में दवाओं और अन्य मेडिकल सामग्री के स्टॉक की निगरानी किस तरह की जा रही है। एक्सपायर्ड दवाओं को नियमानुसार नष्ट या निस्तारित करने के बजाय नदी के पास फेंके जाने की पुष्टि होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।

फिलहाल ADM की ओर से मामले की जांच कराने की बात कही गई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नदी में फेंकी गई दवाएं वास्तव में अस्पताल की थीं, उनकी मात्रा और कीमत कितनी थी तथा इस पूरे मामले के लिए कौन जिम्मेदार है।

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