6 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire
नई दिल्ली: मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विपक्षी INDIA ब्लॉक के सांसदों ने मंगलवार को राजधानी दिल्ली में विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव आयोग की ओर बढ़े।
विपक्षी सांसदों ने मार्च के दौरान नारेबाजी की और चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। विपक्ष की ओर से SIR को तत्काल रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पहले से उठाई जा रही है। मंगलवार का प्रदर्शन इस अभियान को और तेज करने के तौर पर देखा जा रहा है।
SIR रद्द करने और मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग
विपक्षी नेताओं का मुख्य आरोप मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाए जाने को लेकर है। कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने दावा किया कि 13 करोड़ वोट हटा दिए गए हैं और इससे संबंधित लोगों को मतदान के लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित किया गया है।
एएनआई से बातचीत में धर्मवीर गांधी ने इसे भारतीय राजनीतिक इतिहास का सबसे बड़ा धोखा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने ज्ञानेश कुमार के सहयोग से देश के लोगों के खिलाफ यह किया है।
गांधी ने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र को बहाल करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए संघर्ष करेगा। उनके ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए राजनीतिक दावे हैं।
BJP के आरोपों पर विपक्ष का पलटवार
कांग्रेस सांसद धर्मवीर गांधी ने भारतीय जनता पार्टी की ओर से लगाए जा रहे उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया जाता है।
गांधी ने दावा किया कि संवैधानिक संस्थाओं पर प्रभाव डालने का काम विपक्ष नहीं बल्कि सत्तारूढ़ पक्ष कर रहा है। उन्होंने चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन से जुड़ी व्यवस्था में भारत के मुख्य न्यायाधीश को पैनल से हटाए जाने का भी मुद्दा उठाया।
उन्होंने जांच एजेंसियों, मीडिया और अन्य संस्थाओं पर भी सरकार के प्रभाव का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद के अनुसार, विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
CEC के इस्तीफे और उच्चस्तरीय जांच की मांग
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने विपक्ष की मांगों को स्पष्ट बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
हुसैन ने कहा कि SIR को खत्म किया जाना चाहिए और SIR के तहत जिन मतदाताओं के नाम हटाए या डिलीट किए गए हैं, उन्हें दोबारा मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने चुनावी व्यवस्था में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच की मांग भी रखी। हुसैन ने दावा किया कि इस जांच के माध्यम से यह पता लगाया जाना चाहिए कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के पीछे कौन लोग हैं और कथित तौर पर वोटों के माध्यम से सत्ता में बने रहने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया गया।
हुसैन ने कहा कि विपक्ष की मांग केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर संवैधानिक संस्थाओं के भीतर से भी सवाल उठने की बात सामने आई है।
चुनाव आयोग के भीतर से सवाल उठने का दावा
सैयद नसीर हुसैन ने अपने आरोपों के समर्थन में चुनाव आयोग में काम कर रहे दो चुनाव आयुक्तों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि आयोग में मौजूद दो चुनाव आयुक्तों ने ही उन मुद्दों को सामने रखा है, जिन्हें अब विपक्ष उठा रहा है।
हुसैन ने कहा कि विपक्ष अकेला ऐसा पक्ष नहीं है जिसने इन मुद्दों को उठाया है। उनके अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर से भी ऐसी बातें सामने आई हैं और अदालत की टिप्पणियों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
हालांकि, ये सभी बातें हुसैन द्वारा लगाए गए दावे हैं और इन्हें विपक्ष की राजनीतिक स्थिति के रूप में देखा जा रहा है।
‘सेव डेमोक्रेसी’ अभियान के तहत प्रदर्शन
विपक्षी INDIA ब्लॉक का यह मार्च व्यापक ‘सेव डेमोक्रेसी’ अभियान का हिस्सा बताया गया है। विपक्षी नेता चुनाव आयोग से मतदाता सूची से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता की मांग करते रहे हैं।
इस अभियान के तहत विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। मंगलवार को कई INDIA ब्लॉक दलों के नेताओं और सांसदों के मार्च में शामिल होने की बात कही गई।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े कथित विवादों पर चुनाव आयोग को पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
चुनाव आयोग तक मार्च से बढ़ा राजनीतिक टकराव
विपक्षी सांसदों का चुनाव आयोग की ओर मार्च ऐसे समय हुआ है जब मतदाता सूची के कथित बदलाव और SIR को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्ष इस प्रक्रिया को समाप्त करने और हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग कर रहा है।
मंगलवार के प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। विपक्षी नेताओं ने नारेबाजी करते हुए चुनावी व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों की जांच और अधिक पारदर्शिता की मांग की।
मार्च के आगे बढ़ने के साथ ही चुनावी मतदाता सूची को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिले हैं। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लोकतंत्र और मताधिकार से जोड़ते हुए अपना अभियान जारी रखने की बात कही है।
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