2 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire
नई दिल्ली। गांधी जयंती के अवसर पर शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान भारी हंगामा देखने को मिला। छात्र-युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर की ओर कूच किया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग और सुरक्षा बलों की तैनाती की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें शांतिपूर्ण धरना देने और नारे लगाने तक की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, माकपा महासचिव एमए बेबी, राजद सांसद मनोज कुमार झा, योगेंद्र यादव, वृंदा करात, नेहा बोरा और आयशी घोष समेत सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू होने का हवाला देकर उन्हें जंतर-मंतर पहुंचने से रोका। वहीं, संजय सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि गांधी जयंती के दिन लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि यह आंदोलन जारी रहेगा।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने का आरोप
गांधी जयंती के अवसर पर जंतर-मंतर पर सुबह 11 बजे से विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम निर्धारित था। इसमें छात्र-युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न नागरिक संगठनों के लोगों के शामिल होने की योजना थी। प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग था।
प्रदर्शन से जुड़े लोगों का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें शांतिपूर्ण धरना देने की अनुमति नहीं दी। उन्हें जंतर-मंतर की ओर जाने से रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें चेतावनी दी कि नई दिल्ली क्षेत्र में बीएनएसएस की धारा 163 लागू है और किसी को भी वहां पहुंचने की अनुमति नहीं है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस की सख्ती के कारण वे जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच सके। इसके बावजूद छात्र-युवा और विभिन्न नागरिक संगठनों से जुड़े लोग दिनभर प्रदर्शन स्थल की ओर जाने का प्रयास करते रहे।
संजय सिंह और दिल्ली पुलिस के बीच हुई नोकझोंक
प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और दिल्ली पुलिस के बीच भी नोकझोंक हुई। संजय सिंह जंतर-मंतर की ओर जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की।
इस दौरान संजय सिंह ने पुलिसकर्मियों से सवाल किया कि क्या एक सांसद को संसद जाने से रोका जा सकता है और क्या कोई सांसद जंतर-मंतर पर आंदोलन नहीं कर सकता?
संजय सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की। उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया। इस घटनाक्रम के दौरान संजय सिंह ने अपनी बात रखी और विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और पुलिस शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने की अनुमति भी नहीं दे रही हैं। संजय सिंह ने गांधी जयंती के दिन प्रदर्शनकारियों को रोकने की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
संजय सिंह बोले- बापू की जयंती पर लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा
संजय सिंह ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पहुंचे लोगों को पुलिस हिरासत में ले रही है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का अधिकार होना चाहिए। संजय सिंह ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ और यह आंदोलन उनके लिए किसी बुरी खबर से कम नहीं है। संजय सिंह ने दावा किया कि अब इस्तीफा होकर रहेगा।
योगेंद्र यादव, नेहा बोरा और वृंदा करात समेत कई लोग हिरासत में
प्रदर्शन के दौरान कई प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। इनमें माकपा महासचिव एमए बेबी, राजद सांसद मनोज कुमार झा, नेहा बोरा, वृंदा करात, योगेंद्र यादव, एनएस बालाजी, आयशी घोष, सौरभ भारद्वाज और हिमांशु कुमार समेत कई लोग शामिल बताए गए हैं।
प्रदर्शन से जुड़े लोगों के मुताबिक, सुबह से ही पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर वहां से हटाती रही। इसके बावजूद विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता और छात्र-युवा जंतर-मंतर की ओर पहुंचने का प्रयास करते रहे।
प्रदर्शनकारियों की ओर से आरोप लगाया गया कि पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। हालांकि, हिरासत में लिए गए सभी लोगों की अंतिम संख्या और उनकी रिहाई के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
भारी पुलिस बल की तैनाती, दिनभर जारी रहा प्रदर्शनकारियों का कूच
जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रदर्शन स्थल की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई और बड़ी संख्या में पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद छात्र-युवा और नागरिक संगठनों के सदस्य दिनभर जंतर-मंतर की ओर कूच करते रहे। पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में लिया।
इस दौरान सेंट्रल दिल्ली और कनॉट प्लेस के आसपास भी प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लेकर बसों के जरिए वहां से हटाया।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष का प्रदर्शन
जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग था। प्रदर्शन में विपक्षी दलों के नेताओं के साथ छात्र संगठनों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों ने भी हिस्सा लिया।
प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां जताईं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर उठ रही आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, चुनावी धांधली और सरकार की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप प्रदर्शनकारियों के दावे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।
मुंबई में भी कार्यक्रम को लेकर उठे सवाल
प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने मुंबई में भी आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम का जिक्र किया। उनके मुताबिक, मुंबई में सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) का कार्यक्रम 2 अक्टूबर को शाम 4 बजे से निर्धारित था, जबकि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन सुबह 11 बजे से आयोजित किया गया था।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि मुंबई में आयोजित होने वाले कार्यक्रम को अनुमति मिलती है या नहीं। उन्होंने इस संदर्भ में महाराष्ट्र और दिल्ली में भाजपा की सरकार होने का उल्लेख किया।
हालांकि, मुंबई में आयोजित कार्यक्रम को लेकर प्रशासन की अनुमति की स्थिति के बारे में कोई अंतिम जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन पर बनी रही नजर
गांधी जयंती के दिन जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने और पुलिस द्वारा उन्हें रोके जाने की घटनाएं सामने आईं। संजय सिंह समेत कई विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की जानकारी ने इस प्रदर्शन को चर्चा में ला दिया।
प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण धरने की अनुमति नहीं दिए जाने और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात भी कही गई।
फिलहाल, हिरासत में लिए गए सभी लोगों की अंतिम संख्या, उनकी रिहाई और दिल्ली पुलिस की विस्तृत प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि होना बाकी है।
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