आइची-नागोया (जापान), 02 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire

एशियाई खेल 2026 में भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। शुक्रवार को महिलाओं के 75 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में लवलीना ने चीन की बाओ ज़ियी को कड़े मुकाबले में हराकर यह उपलब्धि हासिल की। इस जीत के साथ वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बन गई हैं। इससे पहले मैरी कॉम ने वर्ष 2014 में यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी।

पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली 28 वर्षीय लवलीना ने इस बार अपने अभियान का समापन स्वर्ण पदक के साथ किया। फाइनल में उनका सामना चीन की ऐसी मुक्केबाज से था, जिसका एमेच्योर रिकॉर्ड 14-0 था। इसके बावजूद लवलीना ने पूरे मुकाबले में संयम बनाए रखा और शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की।

चीन की बाओ ज़ियी को हराकर जीता स्वर्ण

शुक्रवार को खेले गए महिलाओं के 75 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में लवलीना बोरगोहेन के सामने चीन की बाओ ज़ियी की चुनौती थी। दोनों मुक्केबाजों के बीच मुकाबला काफी रोमांचक रहा। लवलीना ने शुरुआत से ही सावधानी और आत्मविश्वास के साथ खेल दिखाया।

पहले राउंड में भारतीय मुक्केबाज ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। जजों के स्कोरकार्ड पर लवलीना ने पहला राउंड 3-2 से अपने नाम किया। शुरुआती बढ़त ने उन्हें मुकाबले में मजबूती प्रदान की।

हालांकि, दूसरे राउंड में चीनी मुक्केबाज बाओ ज़ियी ने जोरदार वापसी की। उन्होंने भारतीय मुक्केबाज के करीब पहुंचकर आक्रामक अंदाज में हमले किए। इस दौरान उन्होंने अपरकट का भी इस्तेमाल किया और लवलीना पर दबाव बनाने की कोशिश की।

लेकिन भारतीय मुक्केबाज ने अपना संयम नहीं खोया। दूसरे राउंड के अंतिम हिस्से में लवलीना ने वापसी करते हुए मुकाबले में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। पांच में से चार जजों ने इस राउंड में उनके पक्ष में स्कोर दिया।

इसके बाद भी लवलीना ने पूरे मुकाबले में धैर्य और नियंत्रण बनाए रखा। उनके शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने चीन की मुक्केबाज को हराकर स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया।

एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं

लवलीना बोरगोहेन की इस जीत के साथ भारतीय महिला मुक्केबाजी को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बन गई हैं।

इससे पहले भारत की दिग्गज मुक्केबाज मैरी कॉम ने वर्ष 2014 में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। अब लवलीना ने भी इस विशेष उपलब्धि को हासिल कर लिया है।

लवलीना की इस जीत ने भारतीय मुक्केबाजी में उनके महत्वपूर्ण स्थान को और मजबूत किया है। पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने के बाद इस बार उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया। इस तरह उन्होंने अपने पिछले प्रदर्शन में सुधार करते हुए एशियाई खेलों का खिताब अपने नाम किया।

सेमीफाइनल में कजाकिस्तान की मुक्केबाज को हराकर फाइनल में पहुंचीं

स्वर्ण पदक जीतने से पहले लवलीना को सेमीफाइनल में भी कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था। उनका मुकाबला कजाकिस्तान की नतालिया बोगदानोवा से हुआ था।

सेमीफाइनल मुकाबले में लवलीना शुरुआत में पीछे चल रही थीं। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और बाद के राउंड में शानदार वापसी की। मुकाबले के दौरान दोनों मुक्केबाजों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली।

आखिरकार लवलीना ने 3-2 के स्प्लिट डिसीजन से जीत हासिल की और फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। सेमीफाइनल में मिली इस जीत ने उन्हें स्वर्ण पदक के मुकाबले तक पहुंचाया।

लवलीना के लिए यह मुकाबला आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने दबाव के बीच अपना खेल बनाए रखा। सेमीफाइनल में जीत के बाद उन्होंने फाइनल में प्रवेश किया और वहां चीन की बाओ ज़ियी को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया।

अजेय रिकॉर्ड के साथ उतरी थीं चीन की बाओ ज़ियी

फाइनल मुकाबले में लवलीना के सामने चीन की बाओ ज़ियी एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी के रूप में थीं। एशियाई एलीट चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता बाओ फाइनल में 14-0 के अजेय एमेच्योर रिकॉर्ड के साथ उतरी थीं।

उनका यह रिकॉर्ड मुकाबले को और चुनौतीपूर्ण बना रहा था। बाओ ने दूसरे राउंड में आक्रामक प्रदर्शन करते हुए लवलीना पर दबाव बनाने की कोशिश भी की।

हालांकि, भारतीय मुक्केबाज ने उनके आक्रमण का सामना करते हुए अपना संतुलन बनाए रखा। लवलीना ने पूरे मुकाबले में धैर्य के साथ खेल दिखाया और अंततः जीत हासिल की।

बाओ के अजेय रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए लवलीना ने एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनके लिए प्रतियोगिता का सबसे बड़ा पुरस्कार रहा।

रजत से स्वर्ण तक का सफर

लवलीना बोरगोहेन ने पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक हासिल किया था। इस बार उन्होंने अपने प्रदर्शन को और बेहतर करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया।

फाइनल तक पहुंचने के लिए उन्हें सेमीफाइनल में कजाकिस्तान की नतालिया बोगदानोवा के खिलाफ कड़ा मुकाबला जीतना पड़ा। इसके बाद खिताबी मुकाबले में चीन की बाओ ज़ियी को हराकर उन्होंने स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।

लवलीना की यह उपलब्धि भारतीय मुक्केबाजी के लिए महत्वपूर्ण है। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बन गई हैं। उनकी इस जीत से भारतीय खेल जगत में खुशी का माहौल है।

भारतीय मुक्केबाजी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

एशियाई खेल 2026 में लवलीना बोरगोहेन का स्वर्ण पदक भारतीय मुक्केबाजी के लिए यादगार उपलब्धि बन गया है। उन्होंने महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में चीन की मजबूत मुक्केबाज को हराकर खिताब जीता।

पहले राउंड में बढ़त बनाने से लेकर दूसरे राउंड में चीनी मुक्केबाज के आक्रमण का सामना करने तक लवलीना ने शानदार संयम दिखाया। सेमीफाइनल में भी उन्होंने पिछड़ने के बाद वापसी की थी।

इस तरह लवलीना ने सेमीफाइनल और फाइनल दोनों मुकाबलों में दबाव के बीच बेहतरीन प्रदर्शन किया। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने भारतीय महिला मुक्केबाजी के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।

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