प्रकाशन तिथि: 2 अक्टूबर 2026
बागपत वायर | जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर के बडगाम में भारतीय सेना ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को मार गिराया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हाशिम मूसा पाकिस्तान सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) का पूर्व कमांडो था और हवलदार के पद पर तैनात रह चुका था। बताया जा रहा है कि उसने करीब 23 वर्षों तक पाकिस्तानी सेना में सेवाएं दी थीं। सेवानिवृत्ति के बाद वह आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गया और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने लगा।

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, हाशिम मूसा का सैन्य अनुभव और पाकिस्तान की सेना से उसका पुराना संबंध उसे एक प्रशिक्षित आतंकी बनाता था। वह जम्मू-कश्मीर में कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल रहा था। इनमें पुंछ में भारतीय वायुसेना के काफिले पर हुआ हमला भी शामिल है, जिसमें एक जवान शहीद हो गया था और पांच अन्य घायल हुए थे।

23 साल तक पाकिस्तानी सेना में रहा हाशिम मूसा

सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा पाकिस्तान सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप का पूर्व कमांडो था। वह पाकिस्तानी सेना में हवलदार के पद पर तैनात रहा था। बताया गया है कि उसने लगभग 23 वर्षों तक पाकिस्तानी सेना में सेवा की।

वर्ष 2023 में सेवानिवृत्त होने के बाद उसने लश्कर-ए-तैयबा का दामन थाम लिया। इसके बाद वह अवैध रूप से भारत में घुसपैठ कर जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह घाटी में आतंकी गतिविधियों का नेतृत्व करने वाले प्रमुख आतंकियों में शामिल था।

उसकी सैन्य पृष्ठभूमि को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां उसके प्रशिक्षण, सैन्य अनुभव और आतंकी संगठन में उसकी भूमिका की भी जांच कर रही हैं।

परवेज मुशर्रफ की सुरक्षा टीम में भी रहा शामिल

हाशिम मूसा को लेकर सामने आई जानकारी में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वह पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की सुरक्षा टीम का हिस्सा भी रह चुका था।

जांच से जुड़े विवरणों के अनुसार, वर्ष 2006 से 2008 के बीच हाशिम मूसा को मुशर्रफ की सुरक्षा टीम में तैनात किया गया था। इसके अलावा उसने पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में सैन्य अभियानों में भी हिस्सा लिया था।

बताया गया है कि वह बलूचिस्तान, वजीरिस्तान, खैबर और कुर्रम में पाकिस्तानी सेना के अभियानों में शामिल रहा। इसके साथ ही उसने संयुक्त राष्ट्र के सूडान शांति मिशन में भी सेवाएं दी थीं।

उसकी सैन्य पृष्ठभूमि और विभिन्न अभियानों में भागीदारी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां उसके पुराने रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कर रही हैं।

पुंछ में वायुसेना के काफिले पर हमले में था शामिल

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हाशिम मूसा जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों में शामिल था। इनमें 4 मई 2024 को पुंछ में भारतीय वायुसेना के काफिले पर किया गया घात लगाकर हमला भी शामिल है।

इस हमले में भारतीय वायुसेना का एक जवान शहीद हो गया था, जबकि पांच अन्य जवान घायल हुए थे। हमले में आतंकियों ने वायुसेना के काफिले को निशाना बनाया था।

इसके अलावा हाशिम मूसा पर 21 दिसंबर 2023 को डेरा की गली में हुए आतंकी हमले और अक्टूबर 2024 में गुलमर्ग में हुए हमले में शामिल होने का भी आरोप है।

सुरक्षा एजेंसियां इन घटनाओं में उसकी भूमिका और अन्य आतंकियों के साथ उसके संपर्कों की जांच कर रही थीं।

लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होने के बाद संभाली आतंकी गतिविधियों की जिम्मेदारी

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद हाशिम मूसा लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गया था। इसके बाद उसने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कर आतंकी गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू किया।

उसके सैन्य प्रशिक्षण और अनुभव के कारण आतंकी संगठन में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही थी। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह घाटी में आतंकी गतिविधियों का नेतृत्व कर रहा था।

बडगाम में भारतीय सेना की कार्रवाई में उसके मारे जाने के बाद अब उसके नेटवर्क और अन्य आतंकियों से संपर्कों की जांच की जा रही है।

पाकिस्तानी सेना से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच

हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां उसके पाकिस्तान सेना से जुड़े रिकॉर्ड, सैन्य सेवा, पहचान और आतंकी नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही हैं।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पाकिस्तानी सेना में लंबे समय तक सेवा देने के बाद वह लश्कर-ए-तैयबा में कैसे शामिल हुआ और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में उसकी क्या भूमिका रही।

उसके पुराने सैन्य रिकॉर्ड और विभिन्न अभियानों में भागीदारी से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां उसके संपर्कों और आतंकी संगठन के नेटवर्क से संबंधित जानकारी जुटा रही हैं।

बडगाम में हुई इस कार्रवाई के बाद हाशिम मूसा से जुड़े पुराने आतंकी हमलों और उसके नेटवर्क की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, उसके खिलाफ लगाए गए विभिन्न आरोपों और आतंकी गतिविधियों में उसकी भूमिका से संबंधित विस्तृत जांच जारी है।

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