प्रकाशन तिथि: 1 अक्टूबर 2026
विशेष रिपोर्ट | राजस्थान

पुलिस की नौकरी में लंबी ड्यूटी, काम का दबाव और परिवार के लिए समय की कमी अब कर्मचारियों को दूसरे विकल्प तलाशने के लिए मजबूर कर रही है। राजस्थान में इसका एक दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां 24 पुलिस कांस्टेबलों ने चपरासी की नौकरी करने के लिए पुलिस विभाग से इस्तीफा दे दिया है। इन सभी का चयन स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर हुआ है। खास बात यह है कि बेहतर वेतन या बड़े पद के बजाय ये कर्मचारी घर के नजदीक तैनाती और कम तनाव वाली नौकरी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग में चयनित इन कर्मचारियों को अलग-अलग अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में नियुक्ति दी गई है। हालांकि, पुलिस विभाग में उनके इस्तीफे की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में इन अभ्यर्थियों ने स्वास्थ्य विभाग से जॉइनिंग के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। विभाग ने उन्हें 23 नवंबर तक कार्यभार ग्रहण करने का समय दिया है।

24 कांस्टेबलों ने पुलिस की नौकरी से दिया इस्तीफा

राजस्थान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती के तहत 53,749 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया हुई थी। इनमें स्वास्थ्य विभाग के 7,903 पद शामिल थे। इस भर्ती में चयनित 24 अभ्यर्थी पहले से ही पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे।

स्वास्थ्य विभाग में चयन होने के बाद इन सभी ने पुलिस की नौकरी छोड़ने का फैसला किया। चयनित कर्मचारियों को सीएमएचओ और बीसीएमओ कार्यालयों के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में नियुक्ति मिली है।

हालांकि, पुलिस विभाग से इस्तीफा देने के बावजूद अभी तक सभी कर्मचारियों के त्यागपत्र स्वीकार नहीं हुए हैं। इस वजह से उन्हें नई नौकरी में शामिल होने को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने इन कर्मचारियों को निर्धारित समय में कार्यभार ग्रहण करने के लिए कहा है। इस्तीफे की औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण उन्होंने जॉइनिंग के लिए समय बढ़ाने का आवेदन दिया था।

रेलवे, बीएसएफ और सीआरपीएफ के कर्मचारी भी शामिल

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में केवल पुलिस कांस्टेबल ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों ने भी चयन के बाद नई नौकरी का विकल्प चुना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, चयनित अभ्यर्थियों में 24 पुलिस कांस्टेबलों के अलावा रेलवे के ग्रुप-डी के 11 कर्मचारी, बीएसएफ और सीआरपीएफ के एक-एक कांस्टेबल तथा आयकर विभाग का एक एमटीएस कर्मचारी भी शामिल है।

इन कर्मचारियों के नौकरी बदलने के पीछे घर के नजदीक तैनाती और काम के तनाव से राहत मिलने की उम्मीद प्रमुख कारण बताए गए हैं। सरकारी नौकरी में रहते हुए भी कर्मचारी अपने पारिवारिक जीवन और काम के बीच संतुलन बनाने के लिए नई नौकरी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ, फिर भी जॉइनिंग की तैयारी

स्वास्थ्य विभाग में चयनित पुलिस कांस्टेबलों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती पुराने विभाग से इस्तीफा स्वीकार कराने की है। कई कर्मचारियों ने पुलिस विभाग को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है, लेकिन औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।

स्वास्थ्य विभाग ने चयनित कर्मचारियों को नई नौकरी में शामिल होने के लिए दो महीने का समय दिया है। इसी समय सीमा को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों ने जॉइनिंग के लिए अतिरिक्त समय मांगा है।

रिपोर्ट में तीन कांस्टेबलों के उदाहरण भी दिए गए हैं, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग में नियुक्ति मिली है। इन मामलों से स्पष्ट होता है कि चयन के बाद भी पुराने विभाग से इस्तीफा स्वीकार होने की प्रक्रिया उनके लिए चुनौती बनी हुई है।

भीलवाड़ा में तैनात कांस्टेबल ने चुनी चपरासी की नौकरी

ब्यावर पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत जयसिंह का चयन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में हुआ है। चयन के बाद उन्हें स्वास्थ्य विभाग में नियुक्ति दी गई। विभाग ने 10 अगस्त को उनकी पोस्टिंग भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर स्थित एसडीएच में की।

जयसिंह ने कांस्टेबल की नौकरी से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन उनका त्यागपत्र अभी स्वीकार नहीं हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से उन्हें नई नौकरी में शामिल होने के लिए दो महीने का समय दिया गया है।

इसी तरह ब्यावर पुलिस में कांस्टेबल राकेश माली का भी स्वास्थ्य विभाग में चयन हुआ है। उन्हें अजमेर के मेहरू कलां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नियुक्त किया गया है। राकेश ने भी कांस्टेबल की नौकरी से इस्तीफा सौंप दिया है, लेकिन उनका त्यागपत्र अभी स्वीकार नहीं हुआ है।

कोटा के कांस्टेबल तेजराज सिंह को भी मिली नियुक्ति

कोटा पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत तेजराज सिंह का भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में चयन हुआ है। चयन के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उनकी नियुक्ति कोटा जिले के इटावा क्षेत्र की ढिपरी चंबल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में की है।

तेजराज सिंह ने भी पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दिया है, लेकिन उनका त्यागपत्र अभी स्वीकार नहीं हुआ है। ऐसे में उनके सामने भी नई नौकरी में शामिल होने से पहले विभागीय औपचारिकताएं पूरी करने की चुनौती है।

इन उदाहरणों से पता चलता है कि पुलिस विभाग में कार्यरत कुछ कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति मिलने के बाद अपनी नौकरी बदलने की तैयारी कर रहे हैं।

24 घंटे की ड्यूटी और परिवार को समय नहीं दे पाने की समस्या

पुलिस की नौकरी छोड़कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बनने के पीछे ड्यूटी का दबाव एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पुलिस विभाग में ड्यूटी का कोई निश्चित समय नहीं होता। कानून-व्यवस्था की स्थिति, वीआईपी मूवमेंट या अपराध से जुड़ी घटनाओं के दौरान पुलिसकर्मियों को लगातार 16 से 24 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ सकती है।

इसके विपरीत स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों के लिए ड्यूटी के घंटे निर्धारित होते हैं। हालांकि, वहां भी काम की जिम्मेदारियां होती हैं, लेकिन निश्चित समय और छुट्टियों की व्यवस्था के कारण कर्मचारियों को पारिवारिक जीवन के लिए अधिक समय मिलने की उम्मीद रहती है।

पुलिसकर्मियों को नाइट ड्यूटी, छुट्टी मिलने में परेशानी और अचानक ड्यूटी पर बुलाए जाने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन परिस्थितियों का असर उनके निजी और पारिवारिक जीवन पर भी पड़ता है।

इसी वजह से कुछ कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद को अपने लिए एक बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

वेतन में मामूली अंतर, लेकिन घर के नजदीक नौकरी की उम्मीद

इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू वेतन का है। रिपोर्ट के मुताबिक, सातवें वेतन आयोग के अनुसार दोनों पदों की ग्रेड पे में केवल 700 रुपये का अंतर है।

ऐसे में कुछ कर्मचारियों के लिए वेतन से ज्यादा महत्वपूर्ण घर के नजदीक तैनाती और निश्चित ड्यूटी का समय बन गया है। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत ब्लॉक, सीएचसी और पीएचसी स्तर पर नियुक्ति मिलने से कर्मचारियों को अपने गृह जिले या गांव के आसपास काम करने का अवसर मिल सकता है।

इसके विपरीत पुलिस विभाग में कर्मचारियों को दूरदराज के जिलों और थानों में भी तैनाती मिल सकती है। इससे परिवार से दूरी और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों को पूरा करने में परेशानी हो सकती है।

कुल मिलाकर, राजस्थान में 24 पुलिस कांस्टेबलों का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर जाने का फैसला सरकारी नौकरियों में काम के दबाव, पारिवारिक जीवन और तैनाती जैसे मुद्दों को सामने लाता है। इन कर्मचारियों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती पुलिस विभाग से इस्तीफे की औपचारिकताएं पूरी कर 23 नवंबर की समयसीमा तक नई नौकरी में कार्यभार ग्रहण करना है।