1 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire
पटना: बिहार के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की एक बाघिन को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया है। बाघिन को गोरखपुर हवाई अड्डे से विशेष विमान के जरिए उसके नए संरक्षण क्षेत्र तक पहुंचाया गया। संरक्षण के उद्देश्य से बिहार से किसी बाघ को पहली बार दूसरे राज्य के टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया है। इसे बिहार के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सावधानी के साथ पूरा किया गया। बाघिन को 29 सितंबर की शाम वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बेहोश किया गया। इसके बाद उसे रेडियो-कॉलर लगाया गया और आवश्यक पशु चिकित्सा एवं वन्यजीव प्रबंधन संबंधी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। फिर उसे सुरक्षित तरीके से गोरखपुर हवाई अड्डे पहुंचाया गया, जहां से भारतीय वायु सेना के विशेष विमान ने उसे पश्चिम बंगाल के लिए रवाना किया।
पहली बार बिहार से दूसरे राज्य में बाघ का स्थानांतरण
बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बाघिन को पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित करना राज्य के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में पहली ऐसी पहल है। इससे बिहार की संरक्षण क्षमता और देश के राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्रयासों में उसकी भागीदारी का पता चलता है।
इस स्थानांतरण का उद्देश्य बाघों के संरक्षण के लिए दूसरे राज्य के टाइगर रिजर्व में बाघिन को सुरक्षित रूप से पहुंचाना है। पूरी प्रक्रिया में वन्यजीव प्रबंधन और पशु चिकित्सा से जुड़े आवश्यक प्रोटोकॉल का पालन किया गया।
बाघिन को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई। इसमें उसकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और नए वातावरण में अनुकूलन को ध्यान में रखा गया।
29 सितंबर की शाम वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में किया गया बेहोश
बाघिन को 29 सितंबर 2026 की शाम करीब पांच बजे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में सफलतापूर्वक बेहोश किया गया। इसके बाद विशेषज्ञों ने उसे रेडियो-कॉलर लगाया। रेडियो-कॉलर वन्यजीवों की निगरानी और उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रेडियो-कॉलर लगाए जाने के बाद बाघिन की आवश्यक पशु चिकित्सा जांच और वन्यजीव प्रबंधन से संबंधित प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से गोरखपुर हवाई अड्डे तक पहुंचाया गया।
इस दौरान बाघिन की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई। पूरी प्रक्रिया को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया, ताकि उसे स्थानांतरित करते समय किसी प्रकार की परेशानी न हो।
भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से हुई यात्रा
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से गोरखपुर हवाई अड्डे तक पहुंचाए जाने के बाद बाघिन को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व ले जाया गया।
वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से यह स्थानांतरण एक महत्वपूर्ण अभियान रहा। बाघिन को लंबी दूरी तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए विशेष विमान का इस्तेमाल किया गया। इससे उसके परिवहन की प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा करने में मदद मिली।
बिहार से पश्चिम बंगाल तक बाघिन को पहुंचाने के लिए वन्यजीव प्रबंधन से जुड़ी आवश्यक सावधानियां बरती गईं। परिवहन के दौरान उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा गया।
30 सितंबर की सुबह बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंची बाघिन
बाघिन को 30 सितंबर 2026 की सुबह करीब आठ बजे पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व के निर्धारित सॉफ्ट-रिलीज एनक्लोजर में सुरक्षित पहुंचा दिया गया। यहां उसे नए वातावरण के अनुकूल होने का अवसर मिलेगा।
सॉफ्ट-रिलीज एनक्लोजर वन्यजीवों को नए संरक्षण क्षेत्र में धीरे-धीरे अनुकूल बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस व्यवस्था के जरिए स्थानांतरित किए गए वन्यजीव को नए क्षेत्र में सुरक्षित रूप से बसाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
बाघिन को उसके नए संरक्षण क्षेत्र में सुरक्षित पहुंचाने के साथ ही स्थानांतरण अभियान का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया।
करीब 15 घंटे में पूरी हुई स्थानांतरण प्रक्रिया
बाघिन को बेहोश किए जाने से लेकर बक्सा टाइगर रिजर्व के निर्धारित सॉफ्ट-रिलीज एनक्लोजर तक सुरक्षित पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया लगभग 15 घंटे में पूरी हुई।
29 सितंबर की शाम करीब पांच बजे शुरू हुई यह प्रक्रिया 30 सितंबर की सुबह लगभग आठ बजे अपने निर्धारित पड़ाव पर पहुंची। इस दौरान बाघिन को बेहोश करने, रेडियो-कॉलर लगाने, पशु चिकित्सा संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करने और हवाई परिवहन के जरिए नए संरक्षण क्षेत्र तक पहुंचाने का काम किया गया।
समयबद्ध तरीके से पूरी हुई इस प्रक्रिया को बिहार के वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्रयासों में बिहार की अहम भूमिका
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बाघिन को पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया जाना बिहार के लिए गौरव का विषय है। यह पहल राज्य की बढ़ती संरक्षण क्षमता को दर्शाती है।
इसके साथ ही यह देश में बाघों के संरक्षण के लिए विभिन्न राज्यों के बीच सहयोग का भी उदाहरण है। बिहार से पहली बार किसी बाघ को संरक्षण के उद्देश्य से दूसरे राज्य के टाइगर रिजर्व में भेजा गया है।
इस अभियान के जरिए बिहार ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्रयासों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका दर्ज कराई है। बाघिन को सुरक्षित रूप से नए संरक्षण क्षेत्र में पहुंचाने के साथ ही वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराज्यीय सहयोग की एक नई मिसाल भी सामने आई है।
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