1 अक्टूबर 2026 | Baghpat Wire
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा का शरदकालीन सत्र बुधवार को सात बैठकों के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। 21 से 30 सितंबर तक चले इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने केंद्र शासित प्रदेश के लोगों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। सत्र के समापन पर विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सदन के सुचारू संचालन में सहयोग के लिए सभी सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।
विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में निष्पक्षता बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए स्पष्ट किया कि वह किसी एक राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। उन्होंने सत्र की कम अवधि पर भी अपनी बात रखी और भविष्य में विधानसभा के लंबे सत्र आयोजित करने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि लंबे सत्र होने से जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों और जनता से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने लंबे सत्रों की जरूरत बताई
शरदकालीन सत्र के समापन के दौरान विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सदन की कार्यवाही में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों का धन्यवाद किया। उन्होंने विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी सराहना की।
अध्यक्ष ने कहा कि सदन का संचालन निष्पक्षता के साथ करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा अध्यक्ष के रूप में वह किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि सदन के सभी सदस्यों के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं।
उन्होंने कम अवधि के सत्र की सीमाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में लंबे सत्र आयोजित किए जाने चाहिए। इससे विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को सदन में उठाने का अधिक अवसर मिलेगा।
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने की सत्र की सराहना
सत्र के समापन के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी विधानसभा की कार्यवाही और उसके संचालन को लेकर अपने विचार रखे।
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि सत्र की अवधि भले ही कम रही हो, लेकिन इसके बावजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने जनहित से जुड़े मुद्दों को हल करने का प्रयास किया।
उन्होंने सत्र के दौरान सदस्यों की भागीदारी और जनता से जुड़े विषयों पर हुई चर्चा का उल्लेख किया। उनके अनुसार, कम समय में भी सदन में महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने का प्रयास किया गया।
मोहम्मद यूसुफ तारीगामी ने जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर दिया जोर
माकपा नेता और विधायक मोहम्मद यूसुफ तारीगामी ने बदलती परिस्थितियों में जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका की भी सराहना की। सत्र के समापन पर उनके विचारों में जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और जनता से जुड़े मुद्दों को सामने लाने के महत्व पर विशेष जोर रहा।
भाजपा विधायक ने कम अवधि पर उठाए सवाल
भाजपा विधायक पवन कुमार गुप्ता ने विधानसभा के शरदकालीन सत्र की कम अवधि पर सवाल उठाए। उन्होंने भविष्य में अधिक बैठकें आयोजित करने की मांग की।
उन्होंने लंबे प्रश्नकाल की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि विधानसभा की बैठकों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि विधायकों को अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों और जनता की समस्याओं को सदन में उठाने का पर्याप्त समय मिल सके।
कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने की सराहना
सत्र के समापन के दौरान कांग्रेस विधायक इफ्तिखार अहमद, पीडीपी विधायक आगा मुंतजिर मेहदी और नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक तनवीर सादिक ने भी अपने विचार रखे।
तीनों विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर के मार्गदर्शन और विधानसभा सचिवालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सदन की कार्यवाही के संचालन में अध्यक्ष की भूमिका और सचिवालय के योगदान का उल्लेख किया।
विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के विचारों से सत्र की अवधि, सदन के संचालन और जनहित के मुद्दों पर चर्चा को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए।
21 से 30 सितंबर तक चला विधानसभा का सत्र
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरदकालीन सत्र 21 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर 2026 तक चला। इस दौरान कुल सात बैठकें आयोजित की गईं। सत्र में केंद्र शासित प्रदेश के लोगों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विधायकों ने अपनी बात रखी।
बुधवार को सत्र की अंतिम बैठक के बाद विधानसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके साथ ही शरदकालीन सत्र की कार्यवाही समाप्त हो गई।
सत्र के समापन पर जहां अध्यक्ष ने सदन के संचालन में सहयोग के लिए सभी का आभार जताया, वहीं विभिन्न दलों के नेताओं ने भविष्य में लंबे सत्र और अधिक बैठकों की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
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