प्रकाशन तिथि: 29 सितंबर 2026 | Baghpat Wire

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया है। वर्ष 1997 बैच के पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र पर नोएडा में लीजबैक के तहत जमीन आवंटन में गंभीर अनियमितताएं करने के आरोप लगे थे। जांच में नियमों के विपरीत निजी कंपनियों को जमीन का लाभ पहुंचाने का मामला सामने आया था। संबंधित भूमि की बाजार कीमत करीब 3,800 करोड़ रुपये आंकी गई है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने उनकी बर्खास्तगी की कार्रवाई की।

नोएडा लीजबैक मामले में हुई कार्रवाई

नोएडा में जमीन के लीजबैक से जुड़े मामले में वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। उन पर आरोप था कि उन्होंने लीजबैक की निर्धारित व्यवस्था का पालन नहीं किया और नियमों के विपरीत जमीन का आवंटन किया।

लीजबैक की सुविधा मुख्य रूप से पात्र स्थानीय किसानों के लिए निर्धारित थी। इसके तहत प्रत्येक परिवार को अधिकतम 450 वर्ग मीटर जमीन देने का प्रावधान था। आरोप है कि इस व्यवस्था का लाभ पात्र किसानों तक सीमित रखने के बजाय निजी कंपनियों को भी जमीन उपलब्ध कराई गई।

मामले में सामने आई अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए जांच की गई। जांच के दौरान जमीन आवंटन की प्रक्रिया और संबंधित नियमों के पालन की पड़ताल की गई। इसी जांच के आधार पर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

3,800 करोड़ रुपये आंकी गई जमीन की कीमत

नोएडा के लीजबैक मामले में जांच के दायरे में आई जमीन की बाजार कीमत करीब 3,800 करोड़ रुपये आंकी गई है। इतनी बड़ी कीमत की जमीन से जुड़े मामले में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद यह मामला महत्वपूर्ण हो गया।

लीजबैक व्यवस्था का उद्देश्य पात्र स्थानीय किसानों को निर्धारित शर्तों के अनुसार जमीन का लाभ देना था। इसके लिए प्रति परिवार अधिकतम 450 वर्ग मीटर की सीमा तय थी। हालांकि, हरीश चंद्र पर आरोप लगा कि इस व्यवस्था के नियमों के विपरीत निजी कंपनियों को भी जमीन दी गई।

जमीन की कीमत और आवंटन से संबंधित आरोपों को देखते हुए मामले की जांच की गई। जांच के बाद अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी की गई।

तत्कालीन नोएडा CEO रितु माहेश्वरी ने की थी जांच

इस मामले की जांच नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रितु माहेश्वरी ने की थी। जांच के दौरान लीजबैक के तहत जमीन आवंटन से जुड़े मामलों की पड़ताल की गई।

जांच में नियमों के विपरीत जमीन दिए जाने और निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आए। लीजबैक की निर्धारित शर्तों और पात्रता के नियमों के संदर्भ में मामले की जांच की गई।

जांच के निष्कर्षों के आधार पर हरीश चंद्र के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इसके बाद संबंधित स्तरों पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं।

UPPSC की मंजूरी के बाद बर्खास्तगी

हरीश चंद्र की बर्खास्तगी की कार्रवाई उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद की गई। आयोग की मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया।

इस कार्रवाई के साथ ही नोएडा के लीजबैक मामले में वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी के खिलाफ विभागीय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बर्खास्तगी के आदेश की विस्तृत शर्तों का उल्लेख नहीं है।

कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे हरीश चंद्र

हरीश चंद्र वर्ष 1997 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। वह नोएडा प्राधिकरण में सचिव के पद पर तैनात रह चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान लीजबैक से जुड़े मामले में अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे।

वर्तमान में वह कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग में तैनात थे। सरकार की कार्रवाई के बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का संबंध नोएडा में जमीन आवंटन की प्रक्रिया से जुड़े आरोपों से है। मामले में जांच के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई और UPPSC की अंतिम मंजूरी के बाद बर्खास्तगी का निर्णय लिया गया।

जमीन आवंटन व्यवस्था पर फिर चर्चा

नोएडा के लीजबैक मामले में हुई इस कार्रवाई से जमीन आवंटन की प्रक्रिया और निर्धारित नियमों के पालन का मुद्दा चर्चा में है। लीजबैक की व्यवस्था पात्र स्थानीय किसानों को लाभ देने के लिए थी। इसके तहत प्रत्येक परिवार के लिए अधिकतम 450 वर्ग मीटर की सीमा निर्धारित थी।

इस मामले में आरोप है कि नियमों का उल्लंघन कर निजी कंपनियों को जमीन दी गई। जांच में सामने आए तथ्यों और जमीन की अनुमानित बाजार कीमत को देखते हुए मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी को बर्खास्त किए जाने की कार्रवाई प्रशासनिक स्तर पर भी अहम है। यह मामला जमीन आवंटन से जुड़ी प्रक्रियाओं में नियमों के पालन और अधिकारियों की जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हरीश चंद्र की बर्खास्तगी की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। यह कार्रवाई नोएडा के लीजबैक मामले में हुई जांच और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की अंतिम मंजूरी के बाद की गई है।

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