प्रकाशित तिथि: 24 सितंबर 2026
वॉशिंगटन/बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बुधवार को वॉशिंगटन डीसी पहुंचना अमेरिका-चीन संबंधों के लिहाज से अहम कूटनीतिक घटनाक्रम है। करीब 11 साल बाद उनका अमेरिकी राजकीय दौरा हो रहा है। ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक टैरिफ, तकनीकी पाबंदियों, सैन्य प्रतिस्पर्धा और वैश्विक प्रभाव को लेकर तनाव बना हुआ है, शी जिनपिंग का यह दौरा खास चर्चा में है।
शी जिनपिंग का अमेरिका से रिश्ता हालांकि आज के तनावपूर्ण दौर से काफी अलग दौर में शुरू हुआ था। करीब चार दशक पहले वह कृषि तकनीकों को समझने के लिए अमेरिका के आयोवा राज्य पहुंचे थे। उस समय वह उत्तरी चीन में जिला स्तर के अधिकारी के तौर पर काम कर रहे थे।
आयोवा के फार्महाउस में बिताए थे कई दिन
शी जिनपिंग ने आयोवा यात्रा के दौरान एक स्थानीय अमेरिकी परिवार के घर में कई दिन बिताए और वहां के खेतों का दौरा किया। इस दौरान उनकी मुलाकात आयोवा के तत्कालीन गवर्नर टेरी ब्रैनस्टैड से हुई।
दोनों के बीच बनी यह दोस्ती आगे भी चर्चा में रही। बाद में ब्रैनस्टैड अमेरिका के राजदूत के तौर पर चीन में नियुक्त हुए। चीनी मीडिया में भी शी जिनपिंग की आयोवा यात्रा का उल्लेख अमेरिका के साथ उनके शुरुआती व्यक्तिगत और मानवीय संपर्क के उदाहरण के तौर पर किया जाता रहा है।
लेकिन अमेरिका के साथ उस शुरुआती अनुभव से पहले शी जिनपिंग का जीवन बेहद कठिन दौर से गुजर चुका था।
15 साल की उम्र में गांव भेजे गए शी
1953 में बीजिंग में जन्मे शी जिनपिंग, कम्युनिस्ट क्रांतिकारी और चीन के पूर्व उप-प्रधानमंत्री शी झोंगशुन के बेटे हैं। बचपन में उन्हें अपेक्षाकृत सुविधाजनक माहौल मिला, लेकिन 1960 के दशक में उनके परिवार की परिस्थितियां बदल गईं।
सांस्कृतिक क्रांति के दौर में उनके पिता पर पार्टी विरोधी होने का आरोप लगा और उन्हें राजनीतिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसी दौर में 15 वर्षीय शी जिनपिंग को ‘पुनर्शिक्षा’ के लिए ग्रामीण क्षेत्र भेज दिया गया।
वहां उनका जीवन किसी बड़े शहर के सुविधाजनक माहौल से बिल्कुल अलग था।
सात साल ‘याओदोंग’ में गुजारे
पश्चिमी शान्शी प्रांत के लियांगजियाहे गांव में शी जिनपिंग ने करीब सात साल बिताए। यहां उन्होंने ‘याओदोंग’ नाम की पहाड़ काटकर बनाई गई गुफानुमा रिहाइश में जीवन गुजारा।
इस दौरान उन्हें खेती और शारीरिक श्रम से जुड़े कई काम करने पड़े। उन्होंने खाद ढोने, खाइयां खोदने जैसे काम किए। कठिन परिस्थितियों, भूख और पिस्सुओं के प्रकोप का भी सामना करना पड़ा।
उन दिनों की यादों में साधारण भोजन और कठिन जीवन परिस्थितियों का जिक्र मिलता है। बताया जाता है कि अचार वाली सब्जियां और दोपहर के खाने से पहले मिलने वाला सिगरेट ब्रेक भी उस समय उनके लिए राहत के क्षण होते थे।
शी ने खुद भी याद किया था वह दौर
2004 में अपने उस दौर को याद करते हुए शी जिनपिंग ने कहा था, “ट्रेन में हर कोई रो रहा था, सिर्फ मैं मुस्कुरा रहा था…” उन्होंने यह भी कहा था कि अगर वह वहां से निकल नहीं पाते तो शायद आज जिंदा भी नहीं होते।
एक किशोर के तौर पर ग्रामीण चीन की कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने से लेकर चीन के सर्वोच्च नेतृत्व तक पहुंचने तक शी जिनपिंग का राजनीतिक सफर लंबा और घटनापूर्ण रहा है।
आज वही शी जिनपिंग वॉशिंगटन पहुंच चुके हैं, जहां अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक प्रभाव को लेकर संबंध बेहद महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं।
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