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एमएस सुब्बुलक्ष्मी की बायोपिक में साईं पल्लवी की जगह रश्मिका मंदाना, जानें क्यों बदली कास्टिंग

मुंबई: महान शास्त्रीय गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी के जीवन पर बनने वाली बहुप्रतीक्षित बायोपिक को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने के लिए रश्मिका मंदाना को फाइनल किए जाने की खबर है। इस फिल्म का निर्माण अल्लू अरविंद के बैनर Geetha Arts के तहत किया जा रहा है।

इस बायोपिक के लिए पहले साईं पल्लवी को मुख्य भूमिका के लिए चुना गया था। हालांकि, नितेश तिवारी की फिल्म रामायण समेत उनके अन्य प्रोजेक्ट्स की व्यस्त शूटिंग डेट्स के कारण वह इस फिल्म का हिस्सा नहीं बन सकीं। इसके बाद निर्माताओं ने नई अभिनेत्री की तलाश शुरू की और कई नामों पर विचार किया गया।

साईं पल्लवी की जगह रश्मिका मंदाना

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साईं पल्लवी के प्रोजेक्ट से हटने के बाद रुक्मिणी वसंत समेत कुछ अभिनेत्रियों के नाम पर भी विचार किया गया। आखिरकार निर्माताओं ने रश्मिका मंदाना को इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए चुना।

बताया जा रहा है कि रश्मिका का लुक टेस्ट कराया गया, जिसके बाद उनके नाम को अंतिम रूप दिया गया। अब वह पर्दे पर एमएस सुब्बुलक्ष्मी के जीवन, संगीत और उनकी विरासत को प्रस्तुत करती नजर आएंगी।

एमएस सुब्बुलक्ष्मी भारतीय शास्त्रीय संगीत की सबसे प्रतिष्ठित हस्तियों में शामिल थीं। उन्हें वर्ष 1998 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। वह यह सम्मान पाने वाली पहली संगीतकार थीं।

कौन थीं एमएस सुब्बुलक्ष्मी?

एमएस सुब्बुलक्ष्मी का पूरा नाम मदुरै षण्मुखवडिवु सुब्बुलक्ष्मी था। उन्होंने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत को भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी व्यापक पहचान दिलाई।

उनकी गायकी और भक्ति संगीत की प्रस्तुतियां आज भी भारतीय संगीत जगत में विशेष स्थान रखती हैं। उन्हें पद्म भूषण, रेमन मैग्सेसे पुरस्कार और भारत रत्न समेत कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया।

उनके जीवन पर बनने वाली फिल्म इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को भी बड़े पर्दे पर दिखाने का अवसर मिलेगा।

फिल्मों में कास्टिंग बदलना कोई नई बात नहीं

फिल्म निर्माण के दौरान कलाकारों की जगह दूसरे कलाकारों का आना कोई नई घटना नहीं है। शूटिंग डेट्स, रचनात्मक मतभेद, व्यक्तिगत कारणों या अन्य प्रोजेक्ट्स की व्यस्तता के चलते कई चर्चित फिल्मों में कास्टिंग बदली गई है।

रमेश सिप्पी की ‘शोले’ में गब्बर सिंह की भूमिका के लिए पहले डैनी डेंगजोंगपा का नाम सामने आया था, लेकिन बाद में यह भूमिका अमजद खान ने निभाई और उनका किरदार बेहद लोकप्रिय हुआ।

इसी तरह ‘जंजीर’ में अमिताभ बच्चन को मुख्य भूमिका मिलने से पहले कई अन्य अभिनेताओं के नाम पर विचार किया गया था। इस फिल्म ने अमिताभ बच्चन के करियर को नई दिशा दी।

‘देवदास’ और दूसरी फिल्मों में भी समय-समय पर कलाकारों की कास्टिंग बदली जाती रही है। बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिलते हैं।

दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी बदली गई कास्टिंग

दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी कई फिल्मों के दौरान कलाकार बदले गए हैं। मणिरत्नम की ‘नायकन’ से जुड़ा एक चर्चित उदाहरण अभिनेत्री सुहासिनी का है। फिल्म निर्माण के दौरान उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका में आने का अवसर मिला और आगे चलकर उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।

तेलुगु सिनेमा में भी हाल के वर्षों में डेट क्लैश और अन्य कारणों से कलाकारों के बदले जाने की खबरें सामने आती रही हैं। गुंटूर करम और उस्ताद भगत सिंह जैसी फिल्मों की कास्टिंग को लेकर भी बदलाव की चर्चाएं हुई थीं।

ऐसे में एमएस सुब्बुलक्ष्मी की बायोपिक में साईं पल्लवी की जगह रश्मिका मंदाना का आना फिल्म को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ा सकता है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि रश्मिका पर्दे पर महान गायिका के किरदार को किस तरह प्रस्तुत करती हैं।

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