बागपत, 8 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के बागपत में वर्ष 2017 में हुए चर्चित प्रधान के भतीजे पवन हत्याकांड में अदालत ने करीब नौ साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। सलावतपुर खेड़ी गांव में पुरानी रंजिश को लेकर हुई गोलीबारी में प्रधान अमरदीप के भतीजे पवन की हत्या कर दी गई थी, जबकि दो अन्य युवक भी गोली लगने से घायल हुए थे। गोलीबारी के दौरान पास में बंधे एक बैल को भी गोली लगी थी।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायालय विशेष पॉक्सो के न्यायाधीश संजीव कुमार ने पूर्व प्रधान राजेंद्र और उसके दो बेटों प्रमोद तथा मनोज को हत्या समेत अन्य आरोपों में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने तीनों दोषियों पर 35-35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
फैसला सुनाए जाने के दौरान दोषियों के भावुक होने और रोने की बात भी सामने आई। वहीं अभियोजन पक्ष ने दोषियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की थी।
खड़ंजे के निर्माण को लेकर शुरू हुआ था विवाद
मामला जुलाई 2017 का है। सलावतपुर खेड़ी गांव निवासी नीरज उर्फ राजा ने 9 जुलाई 2017 को खेकड़ा कोतवाली में मामले की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
शिकायत के अनुसार, गांव के प्रधान अमरदीप सिंह की ओर से खड़ंजे का निर्माण कराया जा रहा था। आरोप था कि पूर्व प्रधान राजेंद्र, उसका भाई बाबू और पूर्व प्रधान विरेंद्र इस निर्माण का विरोध कर रहे थे। विवाद बढ़ने पर प्रधान पक्ष ने मामले की शिकायत प्रशासन से की थी।
इसके बाद 3 जुलाई 2017 को तहसीलदार की मौजूदगी में खड़ंजे का निर्माण कराया गया। आरोप है कि इस दौरान पूर्व प्रधान पक्ष ने प्रशासन की टीम का भी विरोध किया था। इसी विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच रंजिश और बढ़ गई।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, विवाद के दौरान धमकियां भी दी गई थीं। इसके कुछ दिन बाद ही 9 जुलाई को गोलीबारी की घटना हुई, जिसने पूरे गांव को दहला दिया।
नीम के पेड़ के नीचे बैठे थे लोग, तभी शुरू हुई फायरिंग
एफआईआर के मुताबिक, 9 जुलाई को नीरज अपने भाई पवन और अन्य लोगों के साथ जोगेंद्र फौजी के मकान के सामने नीम के पेड़ के नीचे बैठे थे। इसी दौरान पूर्व प्रधान राजेंद्र, उसके भाई बाबू, विरेंद्र, मनोज, जगदीप, नवदीप उर्फ डब्बू, संदीप, प्रमोद, अंकित समेत अन्य आरोपी वहां पहुंचे।
आरोप था कि आरोपियों के हाथों में राइफल, रिवॉल्वर और तमंचे थे। वहां पहुंचते ही आरोपियों ने फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई गोलीबारी से मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
कई गोलियां लगने के कारण पवन की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं प्रवीण और सोनू को भी गोली लगी और दोनों घायल हो गए। गोलीबारी के दौरान पास में बंधे एक बैल को भी गोली लगी, जो उसकी गर्दन से आर-पार हो गई।
मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया था।
12 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी एफआईआर
घटना के बाद पुलिस ने कुल 12 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस ने पूर्व प्रधान राजेंद्र समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
जांच के दौरान पुलिस ने कुछ आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में क्लीनचिट दी। इनमें विरेंद्र, संदीप और अंकित समेत चार आरोपी शामिल थे। इसके बाद आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया।
आरोपियों में दो नाबालिग भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान दोनों नाबालिग आरोपियों की पत्रावली अलग कर दी गई। वहीं पूर्व प्रधान समेत छह आरोपियों के मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय विशेष पॉक्सो में हुई।
तीन दोषी, तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में राहत
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पूर्व प्रधान राजेंद्र और उसके बेटों प्रमोद तथा मनोज को दोषी माना।
वहीं बाबू, नवदीन उर्फ डब्बू और साहब सिंह को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
अदालत ने तीनों दोषियों को दोषी करार देने के बाद सजा पर सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख तय की थी।
अभियोजन ने मांगी थी फांसी की सजा
सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी अशोक कुमार ने दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की। अभियोजन ने मामले की गंभीरता और गोलीबारी में हुई हत्या को देखते हुए अदालत से कठोरतम दंड देने का अनुरोध किया।
हालांकि अदालत ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद पूर्व प्रधान राजेंद्र और उसके दोनों बेटों प्रमोद तथा मनोज को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही तीनों पर 35-35 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
नौ साल बाद आया फैसला
सलावतपुर खेड़ी गांव का यह मामला वर्ष 2017 से अदालत में चल रहा था। करीब नौ साल बाद आए फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि मामले में सभी आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया गया और तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया।
यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक और व्यक्तिगत रंजिश के चलते होने वाली हिंसा की गंभीरता को भी सामने लाता है। एक मामूली विवाद से शुरू हुआ खड़ंजे का निर्माण संबंधी विवाद आखिरकार खूनी संघर्ष में बदल गया और पवन की जान चली गई।
अदालत के फैसले के बाद अब इस हत्याकांड में दोषी ठहराए गए पूर्व प्रधान राजेंद्र और उसके दोनों बेटों को उम्रकैद की सजा काटनी होगी। करीब नौ साल तक चले इस मामले में अदालत के फैसले को पीड़ित परिवार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
#BaghpatNews #BaghpatCrime #Baghpat #CrimeNews #UPNews #UttarPradeshNews #MurderCase #MurderNews #CourtNews #CourtVerdict #LifeImprisonment #CrimeInUP #SalawatpurKheri #Khekra #BaghpatPolice #BreakingNews #HindiNews #LatestNews #Justice #BaghpatUpdate














Leave a Reply