बागपत, 5 सितंबर 2026। जिले में गौ संरक्षण और गौ आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को लेकर उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल और सदस्य दीपक गोयल ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में जिले में संचालित गौ आश्रय स्थलों की स्थिति, वहां संरक्षित गौवंश की संख्या, वैक्सीनेशन, स्वास्थ्य सेवाओं और चारे की उपलब्धता समेत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी ली गई।

समीक्षा के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिले में गौवंश को खुले में घूमने से रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए। साथ ही गौ आश्रय स्थलों में मौजूद पशुओं के लिए पर्याप्त चारा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

27 गौ आश्रय स्थलों में 9,131 गौवंश संरक्षित

बैठक में अधिकारियों की ओर से गौ आश्रय स्थलों से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की गई। जिले में कुल 27 गौ आश्रय स्थलों में 9,131 गौवंश संरक्षित होने की जानकारी दी गई। गौ सेवा आयोग के पदाधिकारियों ने इन आश्रय स्थलों में पशुओं की स्थिति और उनके रखरखाव को लेकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली।

समीक्षा में खास तौर पर यह देखा गया कि आश्रय स्थलों में संरक्षित गौवंश को पर्याप्त मात्रा में चारा मिल रहा है या नहीं। इसके अलावा पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी, वैक्सीनेशन और बीमार गौवंश के उपचार की व्यवस्था को लेकर भी जानकारी ली गई।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि गौ आश्रय स्थलों में व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। पशुओं के लिए साफ-सफाई, भोजन, पानी और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।

खुले में घूमने वाले गौवंश को लेकर दिए निर्देश

बैठक में खुले में घूमने वाले गौवंश का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर खुले में घूमने वाले गौवंश से कई बार यातायात प्रभावित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।

गौ सेवा आयोग के पदाधिकारियों ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खुले में घूमने वाले गौवंश को गौ आश्रय स्थलों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए। इसके लिए संबंधित विभागों और स्थानीय स्तर के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया।

निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गौवंश सड़कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षित स्थिति में न रहे और उन्हें निर्धारित गौ आश्रय स्थलों में सुरक्षित रखा जा सके।

वैक्सीनेशन और स्वास्थ्य व्यवस्था की भी समीक्षा

गौ आश्रय स्थलों में संरक्षित गौवंश के स्वास्थ्य को लेकर भी समीक्षा की गई। अधिकारियों से वैक्सीनेशन की स्थिति के बारे में जानकारी ली गई। गौवंश को बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

पदाधिकारियों ने अधिकारियों से कहा कि आश्रय स्थलों में यदि कोई गौवंश बीमार है तो उसके उपचार में देरी नहीं होनी चाहिए। पशु चिकित्सकों की उपलब्धता और नियमित स्वास्थ्य निगरानी पर भी ध्यान देने को कहा गया।

गौ संरक्षण केवल पशुओं को आश्रय देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों का ध्यान रखना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी को देखते हुए समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर विशेष जोर दिया गया।

चारे और संरक्षण की व्यवस्था बेहतर करने पर जोर

गौ आश्रय स्थलों में पर्याप्त चारे की उपलब्धता भी बैठक के प्रमुख मुद्दों में रही। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि गौवंश के लिए चारे की व्यवस्था में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।

इसके साथ ही आश्रय स्थलों में पशुओं के संरक्षण के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया। गौवंश को मौसम और अन्य परिस्थितियों से सुरक्षित रखने के लिए आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए।

पदाधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि गौ आश्रय स्थलों में संरक्षित पशुओं की देखभाल जिम्मेदारी के साथ की जानी चाहिए और व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा होती रहनी चाहिए।

बावली गौशाला का किया निरीक्षण

समीक्षा बैठक के बाद उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल और सदस्य दीपक गोयल ने बावली गौशाला का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने गौशाला में मौजूद व्यवस्थाओं का जायजा लिया और गौवंश की स्थिति देखी।

निरीक्षण के दौरान गौसेवा से जुड़े कार्यों की जानकारी ली गई। पदाधिकारियों ने गौवंश के संरक्षण और सेवा को लेकर स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों पर भी ध्यान दिया।

बावली गौशाला में निरीक्षण के दौरान गौपूजन भी किया गया। इस अवसर पर गौ सेवा के प्रति लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया गया।

लोगों से गौसेवा के लिए आगे आने की अपील

गौ सेवा आयोग के पदाधिकारियों ने कहा कि गौ संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। लोगों से गौसेवा और गौ संरक्षण के प्रति जागरूक होने की अपील की गई।

गौ आश्रय स्थलों में प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ समाज के लोगों की भागीदारी से भी गौवंश की बेहतर देखभाल सुनिश्चित की जा सकती है। इसी उद्देश्य से लोगों को गौसेवा के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों को नियमित निगरानी के निर्देश

समीक्षा बैठक में अधिकारियों को गौ आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए। इसमें गौवंश की संख्या, स्वास्थ्य, वैक्सीनेशन, चारा और संरक्षण व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा करने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि गौ आश्रय स्थलों में उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग हो और संरक्षित गौवंश को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

बैठक और निरीक्षण के दौरान सामने आए निर्देशों के बाद अब संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे गौ संरक्षण से जुड़े इन निर्देशों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करें।

बागपत में गौ संरक्षण को लेकर बढ़ी जिम्मेदारी

बागपत जिले में 27 गौ आश्रय स्थलों में 9,131 गौवंश का संरक्षण किया जाना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है। इतनी संख्या में पशुओं के लिए लगातार भोजन, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण कार्य है।

गौ सेवा आयोग के पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक और बावली गौशाला के निरीक्षण से यह संकेत मिलता है कि गौ संरक्षण से जुड़े कार्यों की निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है। अब देखना होगा कि अधिकारियों के निर्देशों के बाद गौ आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं में किस तरह सुधार होता है और खुले में घूमने वाले गौवंश की समस्या पर कितना प्रभावी नियंत्रण किया जाता है।

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